मंडला जिला अस्पताल एक बार फिर विवादों के घेरे में है। यहां इलाज में कथित कोताही के चलते एक गर्भवती महिला ने अपने शिशु को गर्भ में ही खो दिया। इस हृदय विदारक घटना के बाद परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा और अस्पताल परिसर रणक्षेत्र में तब्दील हो गया।
परिजनों का आरोप है कि महिला को सुबह प्रसव पीड़ा के चलते भर्ती कराया गया था लेकिन दिनभर ड्यूटी डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ ने उसकी सुध नहीं ली। परिजनों का दावा है कि बार-बार मिन्नतें करने के बावजूद शिशु की हार्टबीट चेक नहीं की गई और न ही कोई आपातकालीन उपचार दिया गया। सुबह से शाम तक इंतजार कराने के बाद जब जांच हुई तो डॉक्टरों ने शिशु को मृत घोषित कर दिया।
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शिशु की मौत की खबर मिलते ही पीड़ित परिवार ने अस्पताल में नारेबाजी और प्रदर्शन शुरू कर दिया। स्थिति बिगड़ती देख मौके पर भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा। परिजनों ने स्पष्ट तौर पर दोषी स्टाफ के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन ने आंतरिक जांच समिति का गठन किया है। प्रबंधन ने आश्वासन दिया है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के विरुद्ध सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस की समझाइश के बाद मामला शांत है लेकिन तनाव बरकरार है।
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