यह सड़क वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व की सीमा से होकर गुजरती है, जहां वन्य प्राणियों की मौजूदगी के कारण सड़क हादसों का खतरा लगातार बना रहता था। इसी खतरे को दूर करने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने यहां एक खास तकनीक अपनाई है, जिसे तकनीकी भाषा में कहा जाता है ‘टेबल टॉप रेड मार्किंग’ इस तकनीक के तहत सड़क पर लाल रंग की उभरी हुई मार्किंग की गई है, जो वाहन गुजरने पर हल्का झटका देती है और ड्राइवर की स्पीड अपने आप नियंत्रित हो जाती है।
इसके साथ-साथ वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही के लिए इस प्रोजेक्ट में 25 अंडरपास (पुलिया) भी बनाए गए हैं, ताकि जंगली जानवर बिना खतरे के एक ओर से दूसरी ओर जा सकें। सिर्फ इतना ही नहीं, रात के समय होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सड़क के दोनों किनारों पर पांच मिलीमीटर मोटी व्हाइट शोल्डर लाइन भी बनाई गई है। यह लाइन ड्राइवर को नींद आने या वाहन के किनारे खिसकने की स्थिति में तेज झटका देकर तुरंत सतर्क कर देती है। इस तकनीक का मकसद यात्रियों और वन्यजीवों दोनों का सफर सुरक्षित बनाना है, ताकि भविष्य में यह मार्ग कभी भी फिर से “ब्लैक स्पॉट” न बन पाए।
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