Nainital Gass crisis: नैनीताल में करीब तीन दशकों से तैयार की जा रही यह खास नमकीन स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों के बीच भी बेहद लोकप्रिय है. पहाड़ी दालों और खास मसालों से तैयार की जाने वाली इस नमकीन का स्वाद इतना अलग होता है कि नैनीताल आने वाले पर्यटक इसे अपने साथ यादगार के तौर पर जरूर ले जाते हैं.
नैनीताल में करीब तीन दशकों से तैयार की जा रही यह खास नमकीन स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों के बीच भी बेहद लोकप्रिय है. पहाड़ी दालों और खास मसालों से तैयार की जाने वाली इस नमकीन का स्वाद इतना अलग होता है कि नैनीताल आने वाले पर्यटक इसे अपने साथ यादगार के तौर पर जरूर ले जाते हैं. यही वजह है कि इसकी मांग केवल उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि देश के कई राज्यों और विदेशों तक भी पहुंच चुकी है.
नमकीन का उत्पादन है ठप
शहर के मल्लीताल स्थित प्रसिद्ध बवाड़ी नमकीन के मालिक अखिलेश बवाड़ी बताते हैं कि गैस की किल्लत के कारण उनके यहां नमकीन बनाने का काम लगभग बंद हो गया है. दुकान में फिलहाल केवल एक दिन का ही स्टॉक बचा है. अगर जल्द ही गैस की आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो दुकान बंद करने की नौबत भी आ सकती है. उनका कहना है कि नमकीन बनाने की पूरी प्रक्रिया गैस पर निर्भर होती है. बड़े कढ़ाहों में लगातार तलने और पकाने के लिए गैस की जरूरत पड़ती है, ऐसे में सिलेंडर नहीं मिलने से उत्पादन पूरी तरह रुक गया है.
पर्यटकों के बीच नमकीन की होती है डिमांड
अखिलेश बवाड़ी बताते हैं कि सामान्य दिनों में उनकी दुकान पर रोजाना करीब 70 किलो नमकीन तैयार की जाती थी. कई तरह की इन नमकीनों की डिमांड स्थानीय ग्राहकों के साथ-साथ पर्यटकों के बीच भी काफी ज्यादा रहती है. लेकिन पिछले कुछ दिनों से गैस सिलेंडर समय पर नहीं मिल पा रहे हैं, जिसके कारण उत्पादन बंद करना पड़ा है. उन्होंने कहा कि अगर यही स्थिति रही तो आर्थिक नुकसान के साथ-साथ कर्मचारियों की रोजी-रोटी पर भी असर पड़ेगा. उन्होंने बताया कि इस समय रमजान का महीना चल रहा है और ईद का त्योहार भी नजदीक है. आमतौर पर इस दौरान नमकीन और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग काफी बढ़ जाती है. बीते वर्षों में इस समय दुकान पर ग्राहकों की लंबी कतारें लगी रहती थीं और काम भी काफी ज्यादा होता था. लेकिन इस बार गैस संकट के कारण कारोबार ठप पड़ गया है और दुकानदारों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है.
होटल बंद होने से पर्यटकों को परेशानी
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि नैनीताल जैसे पर्यटन शहर में गैस की कमी का असर सिर्फ घरों तक सीमित नहीं है, बल्कि होटल, रेस्टोरेंट और छोटे-बड़े खाद्य उद्योग भी इससे प्रभावित हो रहे हैं. कई रेस्टोरेंट पहले ही गैस की कमी के कारण अपने किचन सीमित समय के लिए चला रहे हैं, जबकि कुछ जगहों पर वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर इंडक्शन या अन्य साधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है. पर्यटन सीजन करीब आने के कारण कारोबारियों की चिंता और भी बढ़ गई है. मार्च के अंत से नैनीताल में पर्यटकों की संख्या तेजी से बढ़ने लगती है. ऐसे में स्थानीय खान-पान और पारंपरिक उत्पादों की मांग भी बढ़ जाती है. अगर गैस संकट जल्द खत्म नहीं हुआ तो इसका असर पर्यटन कारोबार पर भी पड़ सकता है.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें
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