Kumaoni Holi Celebration: सरोवर नगरी नैनीताल इन दिनों चम्पावत के लोक-रंगों और ऐतिहासिक खड़ी होली के सुरों से महक उठी है. नयना देवी मंदिर के प्रांगण में जब ‘काली कुमाऊं’ के होल्यारों ने ढोल-दमाऊं की थाप पर कदमताल मिलाई, तो सदियों पुराना चंद राजवंश का इतिहास जीवंत हो उठा. 15वीं शताब्दी से चली आ रही यह परंपरा न केवल शास्त्रीय रागों का संगम है, बल्कि इसमें मां बाराही की लोकगाथाओं और राक्षसों के संहार की कहानियों का भी अद्भुत वर्णन मिलता है.
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काली कुमाऊं की होली से महका नैनीताल
इस बार नैनीताल की सांस्कृतिक संस्था युगमंच द्वारा आयोजित खड़ी होली को खास बनाने के लिए चंपावत जिले के खेतीखान से डॉक्यूमेंट्री निर्माण समिति को आमंत्रित किया गया है. समिति के महासचिव और होल्यार देवेंद्र ओली ने बताया कि उनकी संस्था पिछले 21 वर्षों से देश के विभिन्न राज्यों में जाकर खड़ी होली का आयोजन कर रही है. साथ ही वे पिछले 10 वर्षों से नैनीताल स्थित माँ नैना देवी मंदिर में भी नियमित रूप से खड़ी होली का आयोजन करते आ रहे हैं. उन्होंने बताया कि खड़ी होली कुमाऊं की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान है, जिसे चंपावत क्षेत्र में ‘काली कुमाऊं’ की खड़ी होली के नाम से भी जाना जाता है.
यहां यह नृत्य और गीत के रूप में प्रस्तुत की जाती है और लगभग 70 से 80 प्रतिशत लोग इसमें सहभागिता करते हुए खड़ी होली गाते हैं. देवेंद्र ओली ने कहा कि कुमाऊं मंडल के चंपावत जनपद, पिथौरागढ़ तथा नेपाल से लगे क्षेत्रों में यह प्रमुख पर्व के रूप में मनाया जाता है. एकादशी के दिन गाई जाने वाली खड़ी होली में भगवान की आराधना की जाती है. इस परंपरा का उद्देश्य मन के विकारों और नकारात्मक विचारों को बाहर निकालकर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करना है, ताकि मन और तन दोनों स्वस्थ रहें तथा सभी को आशीर्वाद प्राप्त हो.
होली में सुनाई देती है लोकगाथाओं की गूंज
चंपावत से आए होल्यार सुरेश सिंह बोहरा ने बताया कि चंपावत में होली की परंपरा चंद राजवंश के समय से चली आ रही है. उन्होंने कहा कि काली कुमाऊं क्षेत्र के गांवों में खड़ी होली विशेष रूप से गाई जाती है. होली के दौरान चंपावत में अत्यंत उत्साहपूर्ण और आध्यात्मिक वातावरण रहता है, जहां गांव के महिला और पुरुष एक पंक्ति में खड़े होकर सामूहिक रूप से खड़ी होली गाते हैं. यह परंपरा सामाजिक सौहार्द और एकता का संदेश देती है. उन्होंने बताया कि खड़ी होली केवल गीत-संगीत नहीं, बल्कि लोकगाथाओं और पौराणिक कथाओं से भी जुड़ी होती है.
नैनीताल स्थित मां नैना देवी मंदिर परिसर में गाई जा रही होली में मां बाराही देवीधुरा मंदिर का भी उल्लेख किया जाता है. गीतों के माध्यम से मां बाराही के जन्म और उनके द्वारा राक्षसों के संहार की कथा का वर्णन किया जाता है, साथ ही यह भी बताया जाता है कि श्रद्धालु किस प्रकार मां का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं. सुरेश सिंह बोहरा ने बताया कि पिछले 5-6 वर्षों में चंपावत की खड़ी होली और अधिक भव्य और आकर्षक स्वरूप में सामने आई है. होली के दौरान पारंपरिक वाद्ययंत्र जैसे झांझर, ढोल और दमाऊं की थाप पर लोग नृत्य करते हैं और पूरा वातावरण रंग, संगीत और भक्ति से सराबोर हो जाता है. उन्होंने बताया कि चंपावत में होलाष्टक शुरू होते ही होली का उत्सव प्रारंभ हो जाता है. गांव-गांव में होली का आयोजन होता है और लोग घरों में बैठने के बजाय सामूहिक रूप से उत्सव में शामिल होकर इस लोकपर्व का आनंद लेते हैं.
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सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें
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