कुमाऊं की पारंपरिक बैठकी और खड़ी होली की मधुर धुनें वातावरण को सुरमई रंगों से भर देती हैं. ढोल-दमाऊ की थाप और शास्त्रीय रागों पर आधारित होली गीत यहां की खास पहचान हैं. नैनीताल की होली का आनंद स्थानीय लोगों के साथ पर्यटक भी लेते हैं. यहां की होली आपको एक अलग अनुभव देगी. हर कोई पहाड़ के रंगों में रंग जाता है. ऑस्ट्रेलिया से आई पर्यटक डोरीन ने बताया कि वह पहली बार भारत आई हैं और नैनीताल उन्हें बेहद पसंद आया. विनीता ने भावुक होकर कहा कि शायद उनके अच्छे कर्मों का ही फल है कि उन्हें नैनीताल की वादियों में होली मनाने का मौका मिला.
उत्तराखंड के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल नैनीताल की होली इस बार खास रंगों से सराबोर नजर आ रही है. शहर में आयोजित होली उत्सव में कई विदेशी और प्रवासी भारतीय पर्यटक भी जमकर थिरकते दिखाई दिए. ऑस्ट्रेलिया से आई पर्यटक डोरीन ने बताया कि वह पहली बार भारत आई हैं और नैनीताल उन्हें बेहद पसंद आया. उन्होंने कहा कि यहां के लोग बहुत मिलनसार हैं और भारत के त्योहार सचमुच अद्भुत होते हैं. खूबसूरत पहाड़ियों और झीलों के बीच होली मनाने का अनुभव उनके लिए अविस्मरणीय रहा. डोरीन ने अन्य पर्यटकों से भी अपील की कि वे जीवन में एक बार नैनीताल जरूर आएं और यहां की संस्कृति व प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लें. ऑस्ट्रेलिया से ही आई अन्य पर्यटक शैली और विनीता ने भी नैनीताल की होली को यादगार अनुभव बताया. उन्होंने कहा कि यहां होली मनाते हुए उन्हें बेहद खुशी महसूस हुई. शहर का उल्लास और सकारात्मक माहौल उन्हें काफी प्रभावित कर गया.
विनीता के मुताबिक, उनका सपना था कि वे भारत आकर पारंपरिक अंदाज में होली खेलें, जो इस बार नैनीताल में पूरा हो गया. यहां की होली आस्था और मां नयना देवी से जुड़ी परंपराओं से सराबोर है, जो इसे और भी विशेष बनाती है. शैली और विनीता ने भावुक होकर कहा कि शायद उनके अच्छे कर्मों का ही फल है कि उन्हें नैनीताल की वादियों में होली मनाने का अवसर मिला.
फिर आने का वादा
नैनीताल की होली ने इस बार भारतीय पर्यटकों को भी रंगों में सराबोर कर दिया. पर्यटक स्थानीय होल्यारों के साथ जमकर थिरकते नजर आए. महाराष्ट्र से पहुंची पर्यटक वेदिका जोशी ने बताया कि यहां की होली बेहद सादगीपूर्ण, सुंदर और मनमोहक है. उन्होंने कहा कि उन्हें बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि पहाड़ों में इतनी आकर्षक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध होली देखने को मिलेगी. वेदिका ने बताया कि यहां महिलाओं, पुरुषों और बच्चों के अलग-अलग समूह पारंपरिक अंदाज में होली मना रहे हैं. सभी मिलकर पारंपरिक होली गीत गा रहे हैं, जिनमें लोककथाएं और पौराणिक कथाएं समाहित हैं. इन गीतों की धुनों में पहाड़ के सामुदायिक जीवन की गहरी अनुभूति झलकती है, जिसे वे अपने साथ एक खास याद के रूप में लेकर जा रही हैं. वह आने वाले वर्षों में एक बार फिर नैनीताल आकर यहां की होली का आनंद लेना चाहेंगी.
रंगों से सराबोर
नैनीताल की स्थानीय निवासी और नैनी महिला जागृति संस्था की संस्थापक मंजू रौतेला ने बताया कि उनकी संस्था साल 2002 से लगातार मां नैना देवी मंदिर में महिला बैठकी होली का आयोजन कर रही है. पहाड़ की पारंपरिक संस्कृति धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही है, ऐसे में संस्था का प्रयास है कि लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखा जाए. मंजू रौतेला ने बताया कि महिला बैठकी होली में ‘स्वांग’ की परंपरा बेहद अनोखी होती है, जिसमें महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में स्वांग प्रस्तुत करती हैं और लोकगीतों के माध्यम से सांस्कृतिक संदेश देती हैं. नैनीताल शहर का माहौल होली से पहले ही रंगों में सराबोर हो चुका है. एक बार नैनीताल आकर यहां की पारंपरिक होली का अनुभव अवश्य करें.
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Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें
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