झारखंड समेत देश भर के विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और उच्च शिक्षण संस्थानों का नैक से मूल्यांकन लंबे समय ने नहीं हो रहा है। नैक की मान्यता प्रणाली में बदलाव की प्रक्रिया चल रही है। इसलिए 30 जून 2024 के बाद नैक ने पुरानी ग्रेडिंग प्रणाली के तहत नए आवेदन लेना रोक दिया है। इसी कारण देश भर के लगभग लगभग 1,900 से अधिक उच्च शिक्षण संस्थानों के मान्यता प्रस्ताव लंबित है। नैक का मूल्यांकन लंबे समय से स्थगित रहने से शैक्षणिक गतिविधियों पर सीधा प्रभाव पड़ रहा है। नैक मूल्यांकन की पुरानी व्यवस्था खत्म हो चुकी है और नया नियम अभी तक लागू नहीं हुआ है। नैक मूल्यांकन पर नजर रख रहे शिक्षकों का कहना है कि मूल्यांकन पुरानी प्रक्रिया लंबी और जटिल था, जिस कारण बदलाव किया जा रहा है। क्या पड़ रहा है असर जिन संस्थानों के मान्यता प्रस्ताव लंबित हैं, वहां के छात्रों को उच्च शिक्षा, रोजगार और छात्रवृत्ति योजनाओं में समस्या हो सकती है। मान्यता का अभाव डिग्री की मान्यता व मान्यता‑आधारित अवसरों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है सरकारी फंडिंग, भुगतान योजनाएं और शोध अनुदान में व्यवधान आ सकता है। कॉर्पोरेट भर्ती पर भी प्रभाव पड़ता है। क्या कहते हैं संस्थान झारखंड में काफी संख्या में विश्वविद्यालय समेत उच्च शिक्षण संस्थान हैं, जिसका अभी तक नैक से ग्रेडिंग नहीं हुआ है। कई संस्थानों द्वारा मूल्यांकन की तैयारी भी पूरी कर ली गई है। इन संस्थानों का कहना है कि ऑनलाइन आवेदन पोर्टल बंद है, जिसके कारण मूल्यांकन के लिए आवेदन अपलोड नहीं हो रहा है। मूल्यांकन नहीं होने से संस्थानों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इसलिए नैक से मूल्यांकन का प्रस्ताव लंबित नैक ने पुरानी ग्रेडिंग प्रक्रिया को रोक दिया है ताकि नई मान्यता प्रणाली को लागू किया जा सके। नैक नई व्यवस्था के तहत दो‑स्तरीय मान्यता ढांचे पर काम कर रहा है, जिसे लागू होना अभी बाकी है। इससे स्पष्ट है कि नया नियम आने वाले दिनों में प्रभावी होगा। लेकिन इससे पहले ही पुरानी प्रक्रिया को बंद कर दिया गया है। इसलिए आवेदन लंबित है।
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