Muzaffarpur News: मुजफ्फरपुर के जाने माने अधिवक्ता एस.के. झा ने अपने एक केस से जुड़े फर्जी प्रमाण का विरोध करने के लिए एक ऐसा रास्ता अपनाया जिसने सबको हैरानी में डाल दिया. उन्होंने गया जी में दरोगा रामचंद्र सिंह के प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार और श्राद्ध कर्म कराया जो उनके अनुसार अभी जिंदा है.
पूरा मामला साल 2012 से जुड़ा बताया जा रहा है. उस समय एक केस में दरोगा रामचंद्र सिंह को गवाह बनाया गया था. जब न्यायालय ने उन्हें गवाही के लिए तलब किया, तो अदालत में उनकी ओर से एक डेथ सर्टिफिकेट पेश किया गया. इस दस्तावेज में यह दर्शाया गया कि दरोगा रामचंद्र सिंह की मृत्यु साल 2009 में ही हो चुकी है. इस डेथ सर्टिफिकेट के आधार पर वह अदालत में उपस्थित नहीं हुए और मामला आगे बढ़ता रहा.
न्यायालय में पेश किए गए फर्जी कागजात
अधिवक्ता एस.के. झा का कहना है कि दस्तावेजों में कई विरोधाभास सामने आए. उनके अनुसार, जिस व्यक्ति को मृत बताया गया, वह बाद के वर्षों में विभिन्न जगहों पर सक्रिय रहा. अधिवक्ता का दावा है कि दरोगा रामचंद्र सिंह आज भी जीवित हैं, लेकिन गलत और भ्रामक कागजात तैयार कर न्यायालय में पेश किए गए.
इसी घटना से आहत होकर अधिवक्ता एस.के. झा ने उस समय यह प्रण लिया था कि वे इस पूरे मामले की सच्चाई सामने लाएंगे और व्यवस्था को आईना दिखाएंगे. सालों तक चले प्रयासों और दस्तावेजों की पड़ताल के बाद भी जब अदालत के रिकॉर्ड में स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी, तो उन्होंने प्रतीकात्मक रूप से यह कदम उठाया.
विरोध दर्ज कराने का तरीका
आज गया जी में अधिवक्ता की ओर से हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार अंतिम संस्कार और श्राद्ध कर्म संपन्न कराया गया. इस दौरान पिंडदान भी किया गया और धार्मिक विधि का पालन किया गया. अधिवक्ता ने कहा कि जब कोई व्यक्ति खुद को कागजों में मृत घोषित कर देता है और सिस्टम भी उसी को मान ले, तो प्रतीकात्मक रूप से उसका अंतिम संस्कार करना ही उनका विरोध दर्ज कराने का तरीका है.
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