सरसों की फसल पर लाही का बढ़ता खतरा
सरसों की फसल में इन दिनों लाही का प्रकोप तेजी से देखने को मिल रहा है. लाही एक बेहद छोटा, लेकिन नुकसान पहुंचाने वाला रस चूसने वाला कीट है, जो पत्तियों, कलियों और नरम टहनियों से रस चूसकर पौधों को अंदर से कमजोर कर देता है. अगर समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया, तो पूरी फसल बर्बाद होने का खतरा बना रहता है.
लाही से होने वाले प्रमुख नुकसान
लाही के प्रकोप से सरसों की फसल की बढ़वार रुक जाती है और पौधे कमजोर हो जाते हैं. अधिक संक्रमण होने पर फूल झड़ने लगते हैं, जिससे फलियां सही तरीके से नहीं बन पातीं. दानों का विकास प्रभावित होता है, दाने छोटे और सिकुड़े रह जाते हैं. पत्तियां पीली पड़कर मुड़ने लगती हैं और उन पर चिपचिपा पदार्थ दिखाई देता है.
इसी चिपचिपे रस पर काले फफूंद (सूटी मोल्ड) का प्रकोप हो जाता है, जिससे प्रकाश संश्लेषण प्रभावित होता है. कृषि विशेषज्ञ डॉ. प्रमोद कुमार ने बताया कि लाही से सरसों के दानों में तेल की मात्रा भी कम हो जाती है और उपज में 30 से 70 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है. साथ ही यह कीट कई विषाणु रोगों को भी फैलाता है.
कृषि विशेषज्ञ की राय
कृषि विशेषज्ञ डॉ. प्रमोद कुमार ने बताया कि एफिड, जेसिड जैसे कीट रस चूसने वाले होते हैं और ये बहुत कमजोर दिखने के बावजूद फसल को भारी नुकसान पहुंचाते हैं. उन्होंने कहा कि बादल छाए रहने वाले मौसम में लाही का प्रकोप अधिक देखने को मिलता है, इसलिए किसानों को सतर्क रहने की जरूरत है.
रासायनिक नियंत्रण के उपाय
डॉ. प्रमोद कुमार के अनुसार, लाही से बचाव के लिए इमिडाक्लोप्रिड 17.8 प्रतिशत एसएल का छिड़काव 1 मिली प्रति लीटर पानी के हिसाब से किया जा सकता है. इससे फसल को एफिड और लाही से बचाया जा सकता है. इसके अलावा एथियोमैथिजम 12.5 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करने से भी कीटों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है.
जैविक और प्राकृतिक उपाय
कृषि एक्सपर्ट ओमकार नाथ बताते हैं कि वे जैविक खेती करते हैं. वहीं, सरसों की खेती जैविक विधि से करने वाले किसानों के लिए नीम आधारित उपाय कारगर हैं. नीम तेल 3–5 मिली प्रति लीटर पानी में मिलाकर या नीम की पत्ती व बीज की खली का अर्क बनाकर 7–10 दिन के अंतराल पर छिड़काव किया जा सकता है.
खेत में लेडीबर्ड बीटल, सिरफिड मक्खी और क्राइसोपरला जैसे मित्र कीटों का संरक्षण जरूरी है. इसके अलावा ट्रैप क्रॉप के रूप में खेत के किनारे तोरिया या पीली सरसों बोने से मुख्य फसल सुरक्षित रहती है. गोमूत्र का 5–10 प्रतिशत घोल और लहसुन-मिर्च का जैविक घोल भी लाही को दूर भगाने में सहायक होता है.
निगरानी और संतुलित खेती जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि अधिक नाइट्रोजन खाद देने से लाही का प्रकोप बढ़ता है, इसलिए संतुलित उर्वरक का प्रयोग करें. फूल आने की अवस्था में खेत की नियमित निगरानी कर शुरुआती स्तर पर ही नियंत्रण उपाय अपनाएं, ताकि भारी नुकसान से बचा जा सके.
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