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Mushrooms Farming: ओएस्टर मशरूम की खेती आज किसानों के लिए अतिरिक्त आय का बेहतर विकल्प बनकर उभर रही है. कम जगह, कम लागत और कम समय में तैयार होने वाली यह फसल छोटे किसानों के लिए खास तौर पर लाभकारी है. बाजार में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे बिक्री में दिक्कत नहीं होती. सही प्रबंधन और साफ-सफाई का ध्यान रखा जाए तो किसान एक से डेढ़ महीने में अच्छी कमाई कर सकते हैं.
पलामू जिला की एक महिला किसान, ओएस्टर मशरूम की खेती से आत्मनिर्भर बनी हैं. सुषमा देवी ने बताया कि इस बार उन्होंने अपने 10 बाई 15 के कमरे में 100 से अधिक पैकट तैयार किए हैं. घर के एक कमरे से शुरुआत कर उन्होंने अच्छा उत्पादन हासिल किया. उनकी सफलता से आसपास के किसान भी प्रेरित होकर मशरूम उत्पादन की ओर कदम बढ़ा रहे हैं.

ओएस्टर मशरूम का एक बैग तैयार करने में लगभग 60 से 70 रुपए तक खर्च आता है. इसमें भूसा, बीज (स्पॉन) और पॉलीबैग की जरूरत होती है. भूसे को उबालकर या भाप देकर कीटाणुरहित किया जाता है, फिर उसमें मशरूम का बीज मिलाकर बैग में भर दिया जाता है. 8 से 10 दिनों में बैग से मशरूम निकलना शुरू हो जाता है.

उन्होंने आगे कहा कि एक बैग से औसतन 2 से 3 किलो तक मशरूम उत्पादन होता है. यदि किसान एक कमरे में 100 बैग लगाते हैं, तो करीब 200 से 250 किलो यानी 2 से 2.5 क्विंटल तक उत्पादन संभव है. स्थानीय बाजार में 120 से 200 रुपए प्रति किलो तक कीमत मिल जाती है, जिससे कुल आय काफी आकर्षक बन जाती है.
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मशरूम की एक फसल लगभग 30 से 45 दिनों में तैयार हो जाती है. यदि 100 बैग लगाए जाएं और औसतन 200 किलो उत्पादन मिले, तो बिक्री से 30 से 40 हजार रुपए तक की आमदनी हो सकती है. बेहतर बाजार मिलने पर यह कमाई 50 हजार रुपए तक पहुंच सकती है. लागत घटाने के बाद भी मुनाफा अच्छा रहता है.

उन्होंने कहा कि मशरूम की खेती में साफ-सफाई और नमी का विशेष ध्यान रखना पड़ता है. कमरे का तापमान 20 से 30 डिग्री के बीच होना चाहिए. सीधी धूप से बचाव और नियमित पानी का छिड़काव आवश्यक है. थोड़ी सी लापरवाही से फफूंदी लग सकती है, इसलिए स्वच्छ वातावरण बनाए रखना बेहद जरूरी है.

ओएस्टर मशरूम की खासियत यह है कि इसे छोटे कमरे, शेड या खाली गोदाम में भी उगाया जा सकता है. बैग को रैक बनाकर एक के ऊपर एक लगाया जा सकता है, जिससे कम जगह में ज्यादा उत्पादन लिया जा सके. यही कारण है कि भूमिहीन या सीमांत किसान भी इसे आसानी से अपना सकते हैं.

उन्होंने कहा कि पारंपरिक खेती के साथ मशरूम उत्पादन जोड़कर किसान अपनी आय दोगुनी कर सकते हैं. कम लागत, कम समय और बेहतर बाजार के कारण ओएस्टर मशरूम खेती युवाओं और महिलाओं के लिए भी रोजगार का अच्छा माध्यम बन रही है. सही प्रशिक्षण और बाजार संपर्क से यह व्यवसाय स्थायी आय का मजबूत स्रोत बन सकता है.
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