एक हादसे में बचपन में अपने दोनों हाथ गंवाने वाले रतलाम के दिव्यांग तैराक अब्दुल कादिर इंदौरी ने दुबई में आयोजित एशियन यूथ पैरा गेम्स में चार पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है। उन्होंने चार इवेंट में भाग लेकर तीन स्वर्ण और एक कांस्य पदक अपने नाम किए। उनकी इस उपलब्धि की खेल जगत और शहरभर में सराहना हो रही है।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर शानदार प्रदर्शन
दुबई में आयोजित एशियन यूथ पैरा गेम्स में अब्दुल कादिर ने 50 मीटर बटरफ्लाई, 50 मीटर बैकस्ट्रोक और 100 मीटर फ्री स्टाइल इवेंट में पहला स्थान हासिल कर गोल्ड मेडल जीते। इसके साथ ही उन्होंने 50 मीटर बटरफ्लाई इवेंट में तीसरा स्थान प्राप्त कर ब्रांज मैडल (रजत पदक) भी अपने नाम किया। चारों इवेंट में उनका प्रदर्शन चर्चा का विषय बना रहा।
कोच के मार्गदर्शन में निखरी प्रतिभा
अब्दुल कादिर के कोच राजा राठौड़ के अनुसार, लगभग छह वर्ष की उम्र में हाईटेंशन लाइन से करंट लगने के कारण अब्दुल ने अपने दोनों हाथ खो दिए थे। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और एक वर्ष बाद तैराकी का प्रशिक्षण लेना शुरू किया। कोच के मार्गदर्शन में कुछ ही समय में उन्होंने तैराकी में दक्षता हासिल कर ली और प्रतियोगिताओं में लगातार सफलताएं प्राप्त करने लगे।
एशियन यूथ पैरा गेम्स तक का सफर
दुबई में आयोजित यह पांचवां यूथ एशियन पैरा गेम्स था, जिसमें 18 वर्ष तक के खिलाड़ी भाग ले सकते हैं। खिलाड़ियों का ट्रायल ग्वालियर में हुआ था, जहां देशभर से आए प्रतिभागियों में से अब्दुल कादिर सहित पांच-छह तैराकों का चयन दुबई एशियन यूथ पैरा गेम्स-2025 के लिए किया गया। इस प्रतियोगिता में विभिन्न खेलों के कुल 162 खिलाड़ी शामिल हुए थे।
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भविष्य की बड़ी प्रतियोगिताओं पर नजर
अब्दुल कादिर इससे पहले वर्ल्ड चैंपियनशिप में भी हिस्सा ले चुके हैं, जिसमें ओलंपिक में कई पदक जीतने वाले जापान और चीन के तैराकों ने भाग लिया था। उस प्रतियोगिता में उन्होंने नौवीं रैंक हासिल की थी। उनके कोच और समर्थकों को उम्मीद है कि आगे वे सीनियर स्तर पर ओलंपिक और एशियन गेम्स में भी भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।
छत पर खेलते समय हुआ था हादसा
करीब 18 वर्षीय अब्दुल कादिर का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। वर्ष 2014 में रतलाम की कलीमी कॉलोनी स्थित अपने घर की छत पर खेलते समय वे हाईटेंशन लाइन की चपेट में आ गए थे। हादसे में उनके दोनों हाथ खराब हो गए, जिन्हें अलग करना पड़ा। इस कठिन दौर के बाद उन्होंने तैराकी को अपनाया और उसे अपनी ताकत बनाया। दुबई प्रतियोगिता से पहले वे पैरा स्पोर्ट्स की राष्ट्रीय स्पर्धा में 9 गोल्ड और 3 सिल्वर मेडल भी जीत चुके हैं।
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