शनिवार को लोक अदालत का मध्यप्रेदश में आयोजन किया जा रहा है। जिसमें 1388 पीठ एक साथ बैठकर 5 लाख से अधिक मामलों को निपटारा किया जाएगा। 205000 कोर्ट में मौजूद मामले और 32000 प्री लिटिगेशन के आधार पर सुलझाने का भी लक्ष्य रखा गया है। राष्ट्रीय विधिक सेवा
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में वर्तमान में मात्र 42 जज हैं और 4 लाख 80 हजार से ज्यादा मामले पेंडिंग हैं। जजों की संख्या कम होने की वजह से हाईकोर्ट में मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कुछ ऐसा ही हाल निचली अदालतों का भी है। यहां पर भी लाखों मामले पेंडिंग हैं. इसलिए समय-समय पर लोक अदालत का आयोजन किया जाता है।
मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की सदस्य सचिव सुमन श्रीवास्तव ने बताया कि “नेशनल लोक अदालत का आयोजन उच्च न्यायालय से लेकर जिला न्यायालयों, तालुका न्यायालयों, श्रम न्यायालयों, कुटुंब न्यायालयों व अन्य न्यायालयों में किया जाएगा. इसमें कोर्ट में लंबित दीवानी और आपराधिक शमनीय प्रकरणों के साथ ही ट्रैफिक चालान, बैंक, विद्युत, श्रम, जलकर और संपत्तिकर से जुड़े प्री-लिटिगेशन मामलों का भी निराकरण किया जाएगा. प्री लिटिगेशन में मामलों को एक ही सीटिंग में खत्म किया जाता है।
नेशनल लोक अदालत के लिए पूरे प्रदेश में कुल 1388 खंडपीठों का गठन किया गया है। इनमें उच्च न्यायालय की तीन पीठों में 8 खंडपीठ और जिला न्यायालयों में 1380 खंडपीठ शामिल है। इन खंडपीठों के समक्ष लगभग 2 लाख 30 हजार से अधिक लंबित प्रकरणों व 3 लाख 20 हजार से अधिक प्री-लिटिगेशन मामलों को विचार के लिए रखा गया है।
आज शनिवार को होने वाली लोक अदालत में विद्युत अधिनियम के अंतर्गत लंबित और प्री-लिटिगेशन मामलों के साथ ही मध्य प्रदेश नगर पालिका अधिनियम के तहत संपत्ति कर और जलकर से जुड़े मामलों में विभिन्न श्रेणी के उपभोक्ताओं को नियमानुसार छूट भी प्रदान की जाएगी। लोक अदालत में प्रकरणों का निराकरण आपसी सहमति और सौहार्दपूर्ण वातावरण में किया जाता है।
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