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E-Token: कृषि अधिकारी संजय सिंह के मुताबिक प्रदेश में खाद वितरण के लिए फॉर्मर आईडी अनिवार्य कर दी गई है. किसानों को खसरा-खतौनी आधार से लिंक कर पंजीयन कराना होगा. ई-विकास पोर्टल से सुबह 10 से 12 बजे तक ई-टोकन जारी होंगे, जो तीन दिन तक मान्य रहेंगे. तय दर से ही उर्वरक मिलेगा और जल्द होम डिलीवरी सुविधा भी शुरू होगी.
ई-विकास पोर्टल लागू
संजय सिंह ने बताया कि खाद वितरण को पारदर्शी और सुव्यवस्थित बनाने के लिए ई-विकास पोर्टल लागू किया गया है. अब किसान सुबह 10 बजे से 12 बजे के बीच घर बैठे ई-टोकन जनरेट कर खाद बुक कर सकेंगे. टोकन जारी होने के बाद किसान को एसएमएस या पोर्टल के माध्यम से जानकारी मिलेगी. टोकन में उर्वरक का प्रकार, मात्रा, वितरण केंद्र और निर्धारित तिथि अंकित रहेगी. संजय सिंह ने बताया कि ई-टोकन केवल तीन दिन तक मान्य रहेगा. निर्धारित समय में खाद नहीं लेने पर टोकन स्वतः निरस्त हो जाएगा और किसान को दोबारा पंजीयन कराना होगा. पोर्टल पर किसान की भूमि, रकबा और फसल की जानकारी पहले से उपलब्ध रहेगी. वैज्ञानिक अनुशंसा के आधार पर ही उर्वरक की पात्रता तय होगी. किसान अपने क्षेत्र के किसी भी अधिकृत विक्रेता का चयन कर सकता है.
उर्वरकों की कीमतें तय
संजय सिंह ने कहा कि सरकार ने सभी उर्वरकों की कीमतें तय कर दी हैं, जो पोर्टल और ऐप पर प्रदर्शित होंगी. कोई भी रिटेलर निर्धारित दर से अधिक कीमत नहीं ले सकेगा. इससे कालाबाजारी और अव्यवस्था पर रोक लगाने का दावा किया जा रहा है. वहीं, खाद की होम डिलीवरी व्यवस्था भी जल्द पूरे प्रदेश में शुरू होने वाली है. विदिशा जिले में इसका पायलट प्रोजेक्ट सफल रहा है. वित्तीय प्रक्रिया को अंतिम रूप देने के बाद अगले महीने से राज्यभर में यह सुविधा लागू होने की संभावना है.
हालांकि नई व्यवस्था से कुछ किसानों को शुरुआती परेशानी भी हो सकती है. जिनकी जमीन रिकॉर्ड लिंक नहीं है या जो बटाई पर खेती करते हैं, उन्हें दिक्कतें आ सकती हैं. डिजिटल साक्षरता की कमी भी चुनौती बन सकती है.
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Deepti Sharma, currently working with News18MPCG (Digital), has been creating, curating and publishing impactful stories in Digital Journalism for more than 6 years. Before Joining News18 she has worked with Re…और पढ़ें
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