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Mango Care Tips: मार्च महीने में आम के पेड़ों पर मौर से फल बनने की प्रक्रिया शुरू होती है, लेकिन इस समय फल झड़ने की समस्या भी बढ़ जाती है. मौसम में बदलाव, कीट-रोग और गलत सिंचाई के कारण किसान को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है. कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार सही समय पर दवाओं का छिड़काव और देखभाल करने से इस समस्या को रोका जा सकता है. पाउडरी मिल्ड्यू और कीटों से बचाव के लिए सल्फर और अन्य कीटनाशकों का उपयोग जरूरी बताया गया है. सही प्रबंधन अपनाकर किसान अपनी आम की फसल को सुरक्षित रख सकते हैं और बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं.
क्यों झड़ रहे हैं मौर और छोटे फल?
कृषि वैज्ञानिक डॉ. के.डी. महंत बताते हैं कि फरवरी-मार्च में आने वाली मौर ही आगे चलकर फल बनती है. लेकिन इस दौरान अगर पेड़ों पर कीट या रोग लग जाए, तो फूल और छोटे फल गिरने लगते हैं. सबसे आम समस्या है पाउडरी मिल्ड्यू (चूर्णी रोग), जिसमें पत्तियों और फूलों पर सफेद पाउडर जैसा दिखता है. इससे मौर सूखकर झड़ जाती है.
इन दवाओं से बचा सकते हैं फसल
किसानों को सलाह दी गई है कि इस रोग से बचाव के लिए सल्फर या अन्य फफूंदनाशक दवाओं का 1 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें. इसके अलावा थ्रिप्स, माइट्स और हॉपर जैसे कीट भी नुकसान पहुंचाते हैं. इनके लिए इमामेक्टिन बेनजोएट या क्लोरान्ट्रानिलिप्रोल का सही मात्रा में छिड़काव करना जरूरी है.
सिंचाई और खाद में भी न करें गलती
इस समय ज्यादा पानी देना भी नुकसानदायक हो सकता है. वैज्ञानिकों के मुताबिक हल्की और जरूरत के अनुसार ही सिंचाई करें. साथ ही मौर आने के समय ज्यादा खाद या उर्वरक देने से भी बचें, क्योंकि इससे पौधे पर उल्टा असर पड़ सकता है.
धुआं भी बन रहा खतरा
कुछ इलाकों में ईंट भट्टों से निकलने वाला धुआं भी आम के फूलों को नुकसान पहुंचा रहा है. इससे फल काले पड़कर गिरने लगते हैं. ऐसी स्थिति में कार्बेंडाजिम और मैनकोजेब (2 ग्राम प्रति लीटर) का छिड़काव फायदेमंद साबित हो सकता है.
जैविक उपाय भी हैं कारगर
डॉ. महंत ने किसानों को जैविक उपाय अपनाने की भी सलाह दी है. नीम का अर्क, जीवामृत, गोमूत्र या छाछ का घोल बनाकर छिड़काव करने से भी कीटों पर नियंत्रण पाया जा सकता है. साथ ही खेत की साफ-सफाई और नियमित निगरानी भी बेहद जरूरी है.
सही समय पर देखभाल ही बचाएगी फसल
अगर किसान इस समय थोड़ी सावधानी बरतें, सही दवाओं का इस्तेमाल करें और सिंचाई संतुलित रखें, तो मौर और छोटे फलों के झड़ने की समस्या को काफी हद तक रोका जा सकता है. यही समय है जब ध्यान दिया तो पैदावार बढ़ेगी, वरना नुकसान तय है.
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Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें
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