रैली में उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने विपक्ष और अफसरशाही पर तीखे हमले किए. उन्होंने कहा कि आज का विशाल जनसमूह इस बात की गवाही दे रहा है कि कांग्रेस सरकार जनता को साथ लेकर आगे बढ़ रही है. यह भीड़ उन लोगों के लिए चेतावनी है जो यह सोचकर बैठे हैं कि वे बिना मेहनत के सत्ता में वापस आ जाएंगे. उपमुख्यमंत्री ने कहा कि दो साल बचे हैं और कांग्रेस अपने सभी वादों को पूरा करेगी—चाहे महिलाओं को 1500 रुपये दें या 300 यूनिट फ्री बिजली. उन्होंने कहा कि सरकार ने ‘छोटी सोच’ को खत्म करने की शपथ ली है और जो भी व्यक्ति—अफसर हो, कर्मचारी हो या नेता—सरकार के खिलाफ साजिश करेगा, उससे सख्ती से निपटा जाएगा.
अग्निहोत्री ने मंच से अफसरशाही को भी सीधे चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि जो अधिकारी सरकार रहते हुए भाजपा नेताओं के घर हाजिरी लगा रहे हैं या साजिश कर रहे हैं, उनसे सख्ती से निपटा जाएगा. “रात के अंधेरे में निपटा देंगे” जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए उन्होंने संकेत दिया कि कांग्रेस सरकार किसी भी साजिश को बर्दाश्त नहीं करेगी. उन्होंने स्पष्ट कहा कि अब काम ऐसे नहीं चलेगा और जिन अधिकारियों में ‘दोहरा चरित्र’ मिलेगा, उनसे कोई रियायत नहीं बरती जाएगी.
अग्निहोत्री ने कहा कि कांग्रेस उस पार्टी की वारिस है जिसने हिमाचल को बनाया. अगर इंदिरा गांधी और नेहरू–गांधी परिवार का सहयोग न होता तो आज प्रदेश को पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं मिलता. उन्होंने कहा कि डॉक्टर वाईएस परमार की भूमिका को कभी भुलाया नहीं जा सकता. उन्होंने याद दिलाया कि बीजेपी उस समय हिमाचल के गठन के खिलाफ थी और महा पंजाब का समर्थन कर रही थी, जबकि कांग्रेस ने हिमाचल को आकार दिया.
उन्होंने प्राकृतिक आपदाओं का जिक्र करते हुए कहा कि 2022 से 2025 तक राज्य में भयंकर तबाही देखने को मिली. कई परिवार उजड़ गए और कई लोग लापता हुए. उपमुख्यमंत्री ने कहा कि पहली बार हिमाचल के इतिहास में इतनी बड़ी राहत राशि जारी की गई है. लगभग आठ लाख रुपये प्रति प्रभावित परिवार और 4500 करोड़ रुपये से अधिक की राशि राहत पैकेज में की गई है. उन्होंने कहा कि सरकार लगातार लोगों की मदद कर रही है, लेकिन दुख की बात यह है कि भाजपा नेता दिल्ली जाकर राज्य के हक रोकने की कोशिश कर रहे हैं.
मुकेश अग्निहोत्री ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने 1500 करोड़ की घोषणा की थी, लेकिन भाजपा नेता दिल्ली में यह राशि जारी न होने देने की पैरवी कर रहे हैं. ओपीएस को लेकर उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने 1600 करोड़ रुपये रोक दिए और इसे बंद करने का दबाव बनाया. उपमुख्यमंत्री ने मंच पर ही मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि ओपीएस को कानूनी रूप से स्थायी किया जाए ताकि कोई भी कर्मचारी का अधिकार न छीन सके.
‘केंद्र लगातार बाधाएं खड़ी कर रहा है और इसमें हिमाचल भाजपा भी शामिल’
उन्होंने दावा किया कि हिमाचल के बजट पर कैप लगाने से लेकर विदेशी फंडिंग रोकने तक, हर स्तर पर केंद्र लगातार बाधाएं खड़ी कर रहा है और इसमें हिमाचल भाजपा के नेता शामिल हैं. उन्होंने याद दिलाया कि कांग्रेस सरकार बनने से पहले राज्य पर 75,000 करोड़ रुपये का कर्ज और 12,000 करोड़ रुपये की कर्मचारी देनदारियाँ थीं, लेकिन 36 महीने में सरकार ने लगातार वेतन और पेंशन जारी की हैं. एचआरटीसी को लेकर दुष्प्रचार करने वालों को भी उन्होंने कठोर शब्दों में चेतावनी दी और कहा कि 37 कंडक्टर नियमित किए गए, 9000 कर्मचारियों को ओपीएस दिया गया और 150 करोड़ रुपये के पेंशन क्लेम निपटाए गए. उन्होंने जल जीवन मिशन के 1200 करोड़ रुपये रोकने का आरोप भी भाजपा पर लगाया. उपमुख्यमंत्री ने कहा कि ठेकेदारों को भुगतान इसलिए रुक रहा है क्योंकि भाजपा के नेता केंद्र में हिमाचल की फाइलें अटका रहे हैं. उन्होंने कहा कि सरकार ने कठिन हालात के बावजूद प्रदेश में विकास को पटरी पर लाया है और बड़े प्रोजेक्ट जैसे बल्क ड्रग पार्क को तेज़ी से पूरा किया जा रहा है.
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