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Mango Care Tips: गर्मी के मौसम की शुरुआत होते ही आम के बागानों में एक नई उम्मीद दिखाई देने लगती है. पेड़ों पर मंजर (फूलों की मंजरी) आना किसान के लिए खुशखबरी का संकेत होता है. लेकिन इस समय थोड़ी सी लापरवाही भी उत्पादन को प्रभावित कर सकती है. इसलिए मंजर आने से पहले और मंजर आने के बाद खेतों में पानी और दवाओं का सही प्रबंधन बेहद जरूरी माना जाता है.
कृषि विशेषज्ञ डॉ. प्रमोद कुमार ने लोकल18 को बताया कि जब आम के पेड़ों में मंजर आने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है या मंजर आने वाला होता है, तब खेतों में पटवन यानी सिंचाई नहीं करनी चाहिए. अगर इस समय ज्यादा पानी दिया जाता है तो पेड़ों में मंजर कम आने लगते हैं. यही कारण है कि किसान इस अवधि में पानी का प्रबंधन रोक देते हैं.

ध्यान रखने वाली सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जब तक मंजर में फूल खिलकर फल बनने की प्रक्रिया शुरू नहीं हो जाती, तब तक सिंचाई से बचना चाहिए. जब मंजर में छोटे-छोटे फल दिखाई देने लगें और उनका आकार मसूर के दाने जितना हो जाए, तब पौधों की देखभाल के लिए विशेष स्प्रे का उपयोग किया जाता है.

इस अवस्था में पौधों की वृद्धि और फल के बेहतर सेटिंग के लिए पीजीआर (प्लांट ग्रोथ रेगुलेटर) के रूप में प्लानॉफिक्स का इस्तेमाल किया जाता है. इसके साथ कीट नियंत्रण के लिए इमीडाक्लोरोपिड दवा का स्प्रे भी किया जाता है. इमीडाक्लोरोपिड को 0.6 एमएल प्रति लीटर पानी की दर से मिलाया जाता है.
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वहीं, प्लानॉफिक्स का प्रयोग बहुत सावधानी से करना जरूरी होता है. इसे सिरिंज से नापकर ही मिलाना चाहिए, ताकि मात्रा सही रहे. सामान्यतः चार लीटर पानी में एक एमएल प्लानॉफिक्स मिलाकर घोल तैयार किया जाता है.

विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि अगर गलती से प्लानॉफिक्स की मात्रा अधिक हो जाती है तो इसका उल्टा असर भी हो सकता है. ज्यादा मात्रा में दवा डालने से मंजर या लग चुके छोटे-छोटे फल भी गिर सकते हैं, जिससे उत्पादन में भारी नुकसान हो सकता है.इसलिए किसान भाइयों को चाहिए कि मंजर से फल बनने तक हर चरण में सावधानी बरतें.

सही समय पर सिंचाई रोकना, सही मात्रा में दवा का प्रयोग करना और पौधों की नियमित निगरानी करना ही अच्छी पैदावार की कुंजी है. अगर इन बातों का ध्यान रखा जाए तो आम के बागानों से बेहतर उत्पादन और अधिक मुनाफा हासिल किया जा सकता है.

इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आम के पेड़ों में आए मंजर मजबूत बने रहते हैं और अनावश्यक रूप से झड़ते नहीं हैं. सही समय पर पानी रोकने और दवाओं का संतुलित प्रयोग करने से फूलों से फल बनने की प्रक्रिया बेहतर होती है, जिससे फल गिरने की समस्या कम हो जाती है और उत्पादन बढ़ने की संभावना भी अधिक रहती है.

जब मंजर में लगे छोटे-छोटे फल धीरे-धीरे बढ़कर बड़े आकार के होने लगते हैं, तब किसान दोबारा खेत में पानी का पटवन शुरू करते हैं. इस समय दी गई सिंचाई से फलों का विकास तेजी से होता है, उनका आकार अच्छा बनता है और पेड़ों को भी पर्याप्त पोषण मिलता है. इस तरह समय पर पानी और दवा का सही प्रबंधन करने से आम की फसल अधिक सुरक्षित रहती है और किसानों को बेहतर पैदावार मिलने की उम्मीद बढ़ जाती है.
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