चंडीगढ़ में आठ साल की बच्ची से दुष्कर्म के मामले में जिला अदालत ने सोमवार को दोषी मुकेश उर्फ डाडी (25) को 30 साल की सजा सुनाई है। साथ ही 62 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। अदालत ने 10 दिसंबर को मुकेश को दोषी करार दिया था। इसके अलावा अदालत ने डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विस अथॉरिटी को पीड़िता के बेहतर भविष्य के लिए चार लाख रुपये दिए जाने की सिफारिश भी की है।
पीजीआई चौकी प्रभारी एसआई बबिता ने आरोपी के खिलाफ जांच की थी। बबिता ने पीड़िता की काउंसलिंग कर गंभीरता से जांच कर अदालत में चार्जशीट दायर की थी।
डीएनए रिपोर्ट व अन्य सबूतों के आधार पर दोषी करार
दोषी अदालत में लगातार कहता रहा कि उसने बच्ची के साथ गलत हरकत नहीं की। बचाव पक्ष ने दलील दी कि बच्ची ने न्यायालय में दिए बयान में दो लोगों का जिक्र किया था जबकि गिरफ्तार केवल एक ही आरोपी को किया गया। इसके अलावा मेडिकल जांच और बयानों में अंतर होने की बात भी कही गई। अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और डीएनए रिपोर्ट व अन्य सबूतों के आधार पर आरोपी को दोषी करार दिया। दोषी पीड़िता के पड़ोस में ही रहता था और घटना के बाद खुद को निर्दोष बताकर बचने की कोशिश करता रहा, डीएनए रिपोर्ट ने उसकी सच्चाई उजागर कर दी।
क्या था मामला
मामला दो साल पुराना है। आरोपी ने बच्ची को सामान लाने के बहाने घर में बुलाया। इसके बाद बच्ची के साथ दुष्कर्म किया। घटना के बाद बच्ची ने घर पहुंचकर मां को आपबीती बताई। इसके बाद परिवार ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने वुमन एंड चाइल्ड हेल्पलाइन की काउंसलर की रिपोर्ट के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। एसआई बबिता ने बच्ची का मेडिकल करवाया। जांच के दौरान पुलिस ने पीड़िता के कपड़ों और शरीर से डीएनए सैंपल लिए। फॉरेंसिक जांच में ये सैंपल किसी पुरुष के पाए गए। जब इनका मिलान आरोपी मुकेश के डीएनए से कराया गया तो दोनों मेल खा गए।
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.