जानें क्या है वानस्पतिक मालफॉर्मेशन
वानस्पतिक मालफॉर्मेशन मुख्यत पौधों की नई बढ़वार (vegetative growth) को प्रभावित करता है. इसमें पौधे की सामान्य शाखा वृद्धि रुक जाती है और पत्तियां असामान्य रूप से गुच्छों में विकसित होने लगती हैं. इसे सामान्य भाषा में किसान “झाड़ी बनना” या “झुंडदार पत्तियां” भी कहते हैं.
जानें क्या हैं इसके मुख्य लक्षण
1– छोटी-छोटी पत्तियों के गुच्छे
2- झाड़ी जैसी संरचना
3- नवजात पौधों में अधिक प्रकोप
4- वृद्धि रुकना (Stunted Growth)
5– फलन पर अप्रत्यक्ष प्रभाव
रोग के कारण और वैज्ञानिक समझ
हाल के अनुसंधानों से स्पष्ट हुआ है कि यह रोग केवल एक कारण से नहीं, बल्कि कई कारकों के संयुक्त प्रभाव से विकसित होता है:
1. रोगजनक फफूंद Fusarium mangiferae
2. हार्मोन असंतुलन
3. कली माइट (Bud mite) Aceria mangiferae
4. संक्रमित रोपण सामग्री
रोग के अनुकूल पर्यावरणीय परिस्थितियां
1– तापमान: लगभग 24–28°C (26 ± 2°C सर्वोत्तम)
2– सापेक्षिक आर्द्रता: 65% या अधिक
3– घनी छाया और खराब वायु संचार
4- अधिक नाइट्रोजन उर्वरक का उपयोग
5– युवा पौधों की तीव्र वृद्धि अवस्था
वानस्पतिक मालफॉर्मेशन का एकीकृत प्रबंधन
1. संक्रमित टहनियों की छंटाई (Pruning)
2. रोगमुक्त पौध सामग्री का चयन
3. रासायनिक नियंत्रण
4. प्लैनोफिक्स® (NAA) का उपयोग
5. कोबाल्ट सल्फेट स्प्रे
6. जैविक नियंत्रण
7. पोषण प्रबंधन
8. बाग स्वच्छता (Orchard Sanitation)
नवीन वैज्ञानिक सुझाव
रोग प्रबंधन में Integrated Disease Management (IDM) सबसे प्रभावी रणनीति मानी जा रही है. रोगमुक्त प्लांटिंग मटेरियल और नियमित मॉनिटरिंग से संक्रमण 60–70% तक कम किया जा सकता है.
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