महाराष्ट्र में शीतकालीन सत्र से एक दिन पहले राज्य सरकार की परंपरागत चाय पार्टी का विपक्ष ने रविवार को बहिष्कार कर दिया। विपक्ष ने इसे इसलिए ठुकराया क्योंकि राज्य विधानसभा और विधान परिषद में विपक्ष के नेता की नियुक्ति नहीं की गई है।
कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार ने कहा चाय पार्टी का निमंत्रण व्यक्तिगत विधायकों को भेजा गया, जबकि इसे LoPs को भेजना चाहिए था। यह संवैधानिक पद हैं और इसे खाली रखना संविधान के प्रति अविश्वास दिखाता है। वडेट्टीवार ने यह बयान शिव सेना के भास्कर जाधव, सुनील प्रभु, नितिन राऊत और एनसीपी के अनिल देशमुख के साथ विद्यान भवन परिसर में प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिया।
8 से 14 दिसंबर तक चलेगा शीतकालीन सत्र
बता दें कि महाराष्ट्र विधानसभा का शीतकालीन सत्र 8 से 14 दिसंबर तक नागपुर में आयोजित होगा। शिव सेना (UBT) के नेता जाधव को विधानसभा में एलओपी पद के लिए नामित किया गया है, लेकिन स्पीकर द्वारा अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया। विधान परिषद में कांग्रेस ने अपने एमएलसी सतेज पाटिल को एलओपी पद के लिए नामित किया है। राज्य विधान परिषद अध्यक्ष राम शिंदे ने कहा कि एलओपी नियुक्ति का प्रस्ताव उनके कार्यालय में प्राप्त हुआ है और संबंधित पक्षों से चर्चा के बाद निर्णय लिया जाएगा।
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विपक्ष ने दो उपमुख्यमंत्रियों की नियुक्ति को बताया अनावश्यक
विपक्ष ने पिछले विधानसभा चुनाव में भारी हार के बावजूद कहा कि संविधान के अनुसार एलओपी का पद हमेशा भरा जाना चाहिए। वडेट्टीवार ने याद दिलाया कि 1980 और 1985 में भाजपा के पास पर्याप्त विधायक होने के बावजूद एलओपी का पद दिया गया था। शिव सेना के नेता भास्कर जाधव ने आरोप लगाया कि सरकार एलओपी पद खाली रखकर डर दिखा रही है। उन्होंने कहा सरकार एलओपी नहीं बना रही लेकिन दो उपमुख्यमंत्री नियुक्त कर दिए हैं, जो किसी कानून में निर्धारित नहीं हैं।
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किसानों की बढ़ती आत्महत्याएं और महिलाओं पर अपराध को लेकर उठाए सवाल
वडेट्टीवार ने किसानों की आत्महत्या, बेरोजगारी और महिलाओं पर बढ़ते अपराध का हवाला देते हुए कहा कि राज्य में हर दिन छह से सात किसान आत्महत्या कर रहे हैं। 2025 के पहले आठ महीनों में महाराष्ट्र में 1,183 किसान आत्महत्या के शिकार हुए। उन्होंने कहा कि किसानों के लिए फंड भेजने के बावजूद केंद्र ने इसे प्राप्त नहीं किया। महिला सुरक्षा पर भी विपक्ष ने सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि 2021 से 2025 के बीच 37,000 बालिकाओं के खिलाफ अपराध दर्ज हुए और राज्य में हर दिन 24 ऐसे मामले सामने आते हैं। विपक्ष ने वन्य जीव हमलों में हुई मौतों, वादा किए गए सरकारी योजनाओं और भ्रष्टाचार का भी जिक्र किया।
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