पंचायती निरंजनी अखाड़ा की महामंडलेश्वर अन्नपूर्णागिरि ने यूजीसी से जुड़े हालिया निर्णयों को लेकर सरकार से गंभीर पुनर्विचार की मांग की है। खिलचीपुर में आयोजित हिंदू सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि UGC समाज के लिए “दोधारी तलवार” साबित हो सकता है जो कुछ वर्गों के लिए विकास का माध्यम बनेगा, वहीं दूसरों के लिए घातक परिणाम ला सकता है। उनके अनुसार, ऐसे निर्णय समाज की व्यापक संरचना और समरसता को प्रभावित कर सकते हैं, इसलिए सरकार को संतुलित और संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
महामंडलेश्वर अन्नपूर्णागिरि ने संबोधन में सामाजिक समरसता पर जोर देते हुए कहा कि भारतीय परंपरा का मूल भाव सबको साथ लेकर चलना है। उन्होंने भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण के उदाहरणों का उल्लेख करते हुए कहा कि आस्था केवल कर्मकांडों में नहीं, बल्कि करुणा और समानता के व्यवहार में दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि समाज की एकता तभी मजबूत होगी जब हर वर्ग के सम्मान और भावनाओं का ध्यान रखा जाएगा।
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शंकराचार्य मामले पर भी रोष
इस दौरान उन्होंने प्रयागराज में माघ मेले से जुड़ी एक घटना का भी जिक्र किया और उस पर रोष जताया। उन्होंने कहा कि घटना चाहे किसी गलतफहमी का परिणाम रही हो, लेकिन शंकराचार्य से जुड़े बटुकों और ब्राह्मणों के साथ जिस तरह का व्यवहार सामने आया, वह स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे पुलिस प्रशासन के अनुशासन के विरुद्ध नहीं हैं, लेकिन ड्यूटी के दौरान धार्मिक प्रतीकों और व्यक्तियों के प्रति असंवेदनशील व्यवहार से वे आहत हैं। महामंडलेश्वर ने कहा कि संत, बटुक और ब्राह्मण समाज की आस्था और परंपरा के प्रतीक हैं, और उनके सम्मान की रक्षा करना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने पुलिस प्रशासन से अपेक्षा जताई कि कानून-व्यवस्था बनाए रखते हुए भी संवेदनशीलता और सम्मान का संतुलन रखा जाए, ताकि ऐसी स्थितियां दोबारा न बनें।
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