चंद्रग्रहण समाप्त होने के बाद मंगलवार शाम श्री महाकालेश्वर मंदिर में पारंपरिक रीति से शुद्धिकरण किया गया। मंदिर के पुजारियों ने पवित्र नदियों के जल से नंदी हाल, गर्भगृह, शिखर और पूरे परिसर को धोकर शुद्ध किया। इसके बाद विधिवत पूजन-अर्चन कर विशेष आरती संपन्न हुई।
चंद्रग्रहण के दौरान देशभर के अधिकांश मंदिरों के कपाट बंद रहे, लेकिन कालों के काल भगवान महाकाल के मंदिर के कपाट बंद नहीं किए गए। श्रद्धालुओं को दर्शन से नहीं रोका गया। हालांकि सूतक काल के कारण भोग अर्पित करने और भगवान के स्पर्श पर प्रतिबंध रखा गया।
ग्रहण समाप्ति के बाद बदला नजारा
करीब 17 मिनट तक चले चंद्रग्रहण के समापन के साथ ही मंदिर परिसर में धुलाई का क्रम शुरू हुआ। नंदी हाल और शिखर सहित पूरे परिसर को पानी से धोया गया। गर्भगृह में पुनः पूजन-अर्चन प्रारंभ किया गया। इसके पश्चात बाबा महाकाल का आकर्षक श्रृंगार किया गया और विशेष आरती की गई। बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने आरती में शामिल होकर दर्शन लाभ प्राप्त किया।
मंदिर के पुजारी महेश शर्मा ने बताया कि महाकाल प्रधान देवता हैं और उन पर सूतक का प्रभाव नहीं माना जाता। इसलिए ग्रहण काल में भी नियमित आरती की गई।
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अन्य मंदिरों में रहे बंद पट
धार्मिक नगरी उज्जैन में सूतक काल की शुरुआत सुबह 6:20 बजे से हुई, जिसके बाद शहर के अधिकांश वैष्णव मंदिरों के पट बंद कर दिए गए। कई मंदिरों के मुख्य द्वारों पर ताले लगाए गए और मूर्तियों को कपड़े से ढंक दिया गया।
चंद्रग्रहण समाप्त होने के बाद शाम को अन्य मंदिरों में भी शुद्धिकरण के बाद पूजन और आरती का क्रम पुनः शुरू हुआ। ग्रहण खत्म होते ही शहर के मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी।
चंद्रग्रहण के बाद ऐसे हुआ श्री महाकाल मंदिर में शुद्धीकरण– फोटो : credit

चंद्रग्रहण के बाद ऐसे हुआ श्री महाकाल मंदिर में शुद्धीकरण– फोटो : credit

चंद्रग्रहण के बाद ऐसे हुआ श्री महाकाल मंदिर में शुद्धीकरण– फोटो : credit
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