मधुबनी के नवचैती दुर्गा स्थान, चकदह में सत्य धर्म संवाद के तत्वावधान में सद्भावना सत्संग एवं भजन दिवस का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य मनुष्यता के स्तर पर सभी समुदायों की एकता, सामाजिक सौहार्द और करुणा को धर्म का मूल तत्व बताते हुए व्यापक संवाद स्थापित करना था। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि हिंसा और वैमनस्यता किसी भी धर्म की शिक्षा नहीं है। उन्होंने जोर दिया कि जाति या लैंगिक आधार पर भेदभाव अधर्म है। यदि किसी व्यक्ति में करुणा का अभाव है, तो उसका आचरण केवल धर्माभास हो सकता है, वास्तविक धर्म नहीं। धर्म का मूल तत्व करुणा, सह-अस्तित्व और मानव-मर्यादा की रक्षा करना है। इस अवसर पर संतों में बलराम दास, रामप्रसाद दास, रामरूप दास और हीरा दासी सहित अन्य संत-महात्माओं ने धार्मिक संदर्भों के माध्यम से धर्म की मानवीय व्याख्या प्रस्तुत की और करुणा-आधारित जीवन दृष्टि पर बल दिया। कार्यक्रम के संयोजक स्वामी राघवेन्द्र ने अथर्ववेद के पृथ्वी सूक्त का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की विविधता उसके मूल ग्रंथों में ही निहित है। स्वामी राघवेन्द्र ने आगे कहा, “मनुष्य के लिए धर्म है, न कि धर्म के लिए मनुष्य।” उन्होंने संगठित धर्मों से समयानुकूल व्याख्या करते हुए समाज में संवाद और निकटता बढ़ाने का आह्वान किया। आशीष रंजन उर्फ आनंद कबीर ने क्षेत्रीय स्तर पर इस आयोजन में सहयोग दिया। उन्होंने कहा कि धर्म में निहित करुणा को समझना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि जब विश्व विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में प्रगति कर रहा है, तब धर्म के नाम पर होने वाले संघर्ष चिंताजनक हैं। कार्यक्रम में पंकज चौधरी, सोहन चौधरी, अजीत पासवान, देवनाथ देवन, कामायनी स्वामी, घनश्याम यादव, गौतम कुमार, विवेक कुमार, वकील यादव, जयकिशोर मंडल, उत्कर्ष कुमार, पूजा कुमारी, ऊषा देवी, रेखा देवी, सोहन कुमार, अमरनाथ चौधरी, राकेश चौधरी, शशिनाथ चौधरी, मिथिलेश रंजन, संजय कुमार, शंभूनाथ चौधरी, सुरेश चौधरी, पप्पु यादव, हर्ष कामत, आशाराम चौधरी सहित क्षेत्र के अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। सत्य धर्म संवाद का यह प्रयास सामाजिक सौहार्द, करुणा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने की दिशा में एक सकारात्मक पहल है।
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