Madhubani News: बिहार के मधुबनी से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है. दरअसल मधुबनी में डीएम सड़क सुरक्षा जागरूकता के लिए जिस वाहन को निकाला, उसी वाहन के जरूरी दस्तावेज ही फेल थे.
मामला सड़क सुरक्षा माह के तहत निकाले गए जागरूकता रथ से जुड़ा है. इस अवसर पर मधुबनी के जिलाधिकारी आनंद शर्मा ने एक रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. इस रथ का उद्देश्य लोगों को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करना था. जिलाधिकारी ने बताया कि रथ के जरिए लोगों को हेलमेट पहनने, सीट बेल्ट लगाने और ट्रैफिक नियमों का पालन करने का संदेश दिया जाएगा, ताकि सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सके.
जागरूकता रथ के दस्तावेज ही निकले गड़बड़
लेकिन जिस वाहन को सड़क सुरक्षा का संदेश देने के लिए चुना गया, वही वाहन नियमों पर खरा नहीं उतर रहा था. जानकारी के मुताबिक, रथ के रूप में इस्तेमाल किए गए चार पहिया वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर BR07 G 8350 है. जांच में सामने आया है कि इस वाहन का परमिट फेल है, इंश्योरेंस भी वैध नहीं है और प्रदूषण प्रमाण पत्र (पॉल्यूशन) भी फेल बताया जा रहा है. यानी आम आदमी के लिए जिन नियमों का उल्लंघन करने पर भारी जुर्माना और कार्रवाई होती है, वही नियम इस सरकारी कार्यक्रम में नजरअंदाज कर दिए गए.
प्रशासन की कार्यशैली पर उठे सवाल
यही वजह है कि अब यह पूरा मामला प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहा है. आम नागरिक अगर बिना इंश्योरेंस, परमिट या पॉल्यूशन के वाहन लेकर सड़क पर निकल जाए तो उसके खिलाफ तुरंत कार्रवाई होती है. सीट बेल्ट, हेलमेट और ओवरस्पीड को लेकर सख्ती दिखाई जाती है. लेकिन जब खुद जिलाधिकारी सड़क सुरक्षा सप्ताह के दौरान ऐसे वाहन को हरी झंडी दिखाएं, तो “कानून सबके लिए बराबर” की बात पर सवाल उठना लाजमी है.
इस पूरे घटनाक्रम ने परिवहन विभाग की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. सवाल यह है कि आखिर ऐसे वाहन को कार्यक्रम के लिए अनुमति कैसे दी गई और अधिकारियों ने दस्तावेजों की जांच क्यों नहीं की. फिलहाल इस मामले को लेकर प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक सफाई सामने नहीं आई है, लेकिन सड़क सुरक्षा के नाम पर नियमों की अनदेखी ने पूरे अभियान की गंभीरता पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं.
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A Multimedia Journalist having experience of more than 14 years in mainstream media Industry. Currently Working with Network 18 Media & Investment Limited for News18 Hindi Website as a Chief Sub Editor. He …और पढ़ें
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