8 जनवरी 2019 की रात, मैं ट्रेन उज्जैन ले जा रहा था। नियमों के कारण फोन साइलेंट था। घर से लगातार कॉल आ रहे थे… पर मैं उठा नहीं सकता था। ड्यूटी खत्म होने पर देखा, मेरे छोटे बेटे के 70 मिस कॉल थे। वो अपने बड़े भाई की खराब तबीयत के कारण बार-बार कॉल कर रहा था। रेलवे के दो साथी उसे अस्पताल ले गए, पर रास्ते में ही उसने दुनिया छोड़ दी। मैं चाहकर भी अपने बेटे के आखिरी पलों में उसके पास नहीं पहुंच सका। यह बात हमेशा चुभती रहेगी। – महेश रैकवार, लोको पायलट यह दर्द किसी एक का नहीं है, बल्कि देशभर के रनिंग लोको पायलट का है। यही कारण है कि वह 10 सूत्रीय मांगों को लेकर 48 घंटे की हंगर फास्ट (भूख हड़ताल) पर चले गए हैं। आंदोलन का अनोखा तरीका…भूखे रहकर ट्रेन चला रहे
ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन (AILRSA) के आव्हान पर 2 दिसंबर सुबह 10 बजे से 4 दिसंबर सुबह 10 बजे तक देशभर में 1 लाख 20 हजार लोको रनिंग स्टाफ बिना भोजन ड्यूटी करेगा। मध्य प्रदेश में यह आंदोलन कटनी, जबलपुर, सतना, सागर, बीना, भोपाल, इटारसी, गुना, कोटा और गंगापुरसिटी की क्रू लॉबी सहित अन्य जिलों में शुरू हो गया है। गुना में लोको पायलट रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म क्रमांक 1 पर हड़ताल पर बैठे हैं। जिन पायलट की ड्यूटी नहीं है, वे टेंट लगाकर हड़ताल पर बैठे हैं और जिनकी ड्यूटी है, वे भूखे रहकर ही ट्रेन चला रहे हैं। दैनिक भास्कर ने लोको पायलट और सहायक लोको पायलट से बात कर काम के दौरान आ रही उनकी समस्याओं को जाना। पहले जान लेते हैं रनिंग लोको पायलट की प्रमुख दस मांगें लोको पायलट ने यह समस्याएं भी बताईं अब जानिए, ड्यूटी के दौरान तीन लोको पायलट को किस तरह परेशानी से गुजरना पड़ा… 30 घंटे एक ही जगह खड़े रहे
लोको पायलट मनोज कुमार ने बताया कि यह उस समय की बात है, जब मैं नागपुर में पदस्थ था। मैं नागपुर से गाड़ी लेकर डोंगरगढ़ गया था। रास्ते में चलते-चलते अचानक गैंग वाला आया और उसने गाड़ी रुकवाई। बोला कि सर आगे पानी है, यहीं रुक जाइए। मैंने वहीं गाड़ी खड़ी कर ली। कुछ देर बाद ट्रेन तक ही पानी आ गया। इंजन तक में पानी घुस गया। पानी बहुत तेजी से आया था। थोड़ी देर बाद जब पानी बह गया, तो एकदम झटका लगा। झटके की जानकारी ली तो पता चला कि पीछे बोगियों के नीचे ट्रैक के नीचे की मिट्टी बह गई है। हम इस दिन लगातार लगभग 30 घंटे काम करते रहे, क्योंकि न आगे जा सकते थे और न पीछे जा सकते थे। भूखे प्यासे वहीं बैठे रहे। बाद में बमुश्किल वहां से निकल पाए। बाढ़ में मेरी कार बह गई
लोको पायलट मनोज कुमार ने बताया कि इसी साल 28-29 जुलाई को गुना में बाढ़ आई। वे गुना से गाड़ी लेकर सागर गए थे, लेकिन गुना की बाढ़ में उनकी कार बह गई और दूसरी कॉलोनी में चली गई। उस समय कार की देखभाल करने वाला कोई नहीं था। एक बार वे बाहर थे, और उनकी मां की अचानक तबीयत खराब हो गई। उनकी 9 साल की बेटी ने फोन करके बताया कि दादी की तबीयत खराब है। उन्होंने बेटी को दवाइयों का पर्चा देखकर दवाइयां बताईं, जिसके बाद बेटी ने ऑनलाइन दवाइयां मंगाकर अपनी दादी को दी। लोको पायलट ने कहा कि ऐसी परिस्थितियां उनके साथ कई बार आती हैं और उन्हें यह सब झेलना पड़ता है। उन्होंने दुख व्यक्त किया कि इन सब मुश्किलों के बावजूद प्रशासन उनकी मांगों को नहीं मान रहा है, जिससे उन्हें बहुत दुख होता है। रेलवे के दस हजार बचाने ट्रेन नहीं रोकते
रेलवे कर्मचारी महेश कुमार बताते हैं कि उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। महेश कुमार बताते हैं कि उन्हें अक्सर कई घंटों तक वॉशरूम जाने का मौका नहीं मिलता, कभी-कभी चार-चार घंटे तक रोकना पड़ता है। वे जनता के टैक्स के पैसे को बचाने के लिए ट्रेन नहीं रोकते, क्योंकि एक बार ट्रेन रोकने में लगभग 10,000 रुपए की ऊर्जा खर्च होती है, भले ही उन्हें अपनी किडनी को नुकसान पहुंचाना पड़े। उन्हें रात-रात भर खाना खाने का समय नहीं मिलता और वे अपनी आंखों में पानी मारकर खुद को नींद आने से बचाते हैं। महेश कुमार ने बताया कि हम अरबों की प्रॉपर्टी की सुरक्षा करते हैं। सावधानी से गाड़ी चलाते हैं, एहतियात से ब्रेक लगाते हैं, ताकि पैसेंजर्स को झटका न लगे। 600 मीटर दूर दो आखिरी पैसेंजर बोगी है, उसका भी ध्यान रखना पड़ता है कि पैसेंजर को झटका न लगे, उनकी चाय न गिर जाए। दो आंखें आगे और एक आंख पीछे रखनी पड़ती है। पैसेंजर्स का भी पूरा ध्यान रखना होता है। इसके बाद भी हमारे साथ सौतेला व्यवहार हो रहा है। हमारी तो यही मांग है कि जब अधिकारियों को मिल गया, तो हमारा माइलेज क्यों नहीं बढ़ाया जा रहा है। सरकारी कर्मचारियों को 48 घंटे से ज्यादा का रेस्ट मिलता है, लेकिन हमें 30 घंटे का भी नहीं दिया जा रहा। 27,28 घंटे में ही कॉल आ जाता है। हमारी सरकार से यही मांग है कि हमारी इन दस सूत्रीय मांगों को तत्काल पूरा किया जाए। हम शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। परिवार तक को समय नहीं दे पाते
बीना में पदस्थ सहायक लोको पायलट अंकित सेंगर ने बताया कि 30 घंटे का रेस्ट मिलता है, जिसमें कोई काम नहीं हो पाता है। न हम परिवार को समय दे पाते हैं, न घर का जरूरी काम कर पाते हैं। इसलिए रेस्ट के समय को बढ़ाया जाए। रेस्ट न मिल पाने के कारण मानसिक तनाव बढ़ रहा है। सेहत पर असर पड़ रहा है। खाना भी ठीक से नहीं मिलता है। कई जगह थोड़ा अच्छा खाना मिलता है, तो कई जगह बहुत खराब क्वालिटी रहती है। सरकार हमारे इन मुद्दों पर ध्यान दे, यही मांग है। संबंधित खबर पढ़ें… 48 घंटे तक भूखे रहकर ट्रेन चला रहे लोको पायलट भारतीय रेलवे के लोको पायलट और सहायक लोको पायलट अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर 48 घंटे की हंगर फास्ट (भूख हड़ताल) पर चले गए हैं। ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन (AILRSA) के आव्हान पर 2 दिसंबर सुबह 10 बजे से 4 दिसंबर सुबह 10 बजे तक देशभर में 1 लाख 20 हजार लोको रनिंग स्टाफ बिना भोजन ड्यूटी करेगा। पूरी खबर पढ़ें
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