उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और उत्तराखंड में गैस की भारी किल्लत ने आम जनजीवन के साथ-साथ औद्योगिक पहिए को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है. सरकार द्वारा घरेलू गैस (PNG) और परिवहन (CNG) को प्राथमिकता देने के कारण औद्योगिक क्षेत्रों में गैस की सप्लाई में 20 से 40 प्रतिशत तक की कटौती की गई है. इस गैस राशनिंग का सीधा असर उत्पादन लागत पर पड़ा है, जिससे बाजार में कई आवश्यक वस्तुओं की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं.
इन प्रमुख वस्तुओं की कीमतों में आया उछाल:
1. स्टील और निर्माण सामग्री
गैस संकट का सबसे बड़ा प्रहार स्टील उद्योग पर हुआ है. विशेष रूप से फर्नेस आधारित स्टील मिलों में उत्पादन 50% तक कम हो गया है. पिछले एक सप्ताह में ही स्टील की कीमतों में ₹2,000 से ₹2,500 प्रति टन का उछाल आया है. इसका सीधा असर निर्माण कार्यों पर पड़ेगा, जिससे घर बनाना और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स महंगे हो जाएंगे.
2. मेडिकल उपकरण और प्लास्टिक
अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली सिरिंज, आईवी बैग और अन्य डिस्पोजेबल मेडिकल उपकरणों के निर्माण में ‘पॉलीप्रोपाइलीन’ का उपयोग होता है, जिसकी कच्ची सामग्री खाड़ी देशों से आती है. गैस की कमी और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण इन उपकरणों की लागत में 15-20% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इसके अलावा, प्लास्टिक से बने घरेलू उत्पादों की कीमतें भी 10% तक बढ़ गई हैं.
3. फुटवियर उद्योग
हरियाणा के बहादुरगढ़ और उत्तर प्रदेश के आगरा व कानपुर जैसे फुटवियर हब में कमर्शियल एलपीजी (LPG) की कमी से फैक्ट्रियां बंद होने के कगार पर हैं. जूतों के निर्माण में लगने वाले केमिकल्स और एडहेसिव्स की कीमतों में 40% तक की तेजी आई है. इसके चलते आने वाले दिनों में जूतों और सैंडल की कीमतों में ₹50 से ₹200 तक की वृद्धि हो सकती है.
4. ड्राईफ्रूट्स और मसाले
चूंकि होर्मुज जलडमरूमध्य से केवल तेल ही नहीं, बल्कि सूखे मेवे जैसे ईरान से आने वाले खजूर, पिस्ता और बादाम का व्यापार भी होता है, इसलिए इनकी सप्लाई चेन पूरी तरह बाधित हो गई है. बाजार में ड्राईफ्रूट्स की कीमतों में 25% तक का उछाल देखा जा रहा है.
5. फूड प्रोसेसिंग और रेस्तरां
बिहार और यूपी के फूड प्रोसेसिंग उद्योगों में बॉयलर चलाने के लिए गैस की जरूरत होती है. सप्लाई कम होने से बिस्कुट, नमकीन और पैकेज्ड फूड की उत्पादन लागत बढ़ गई है. वहीं, कमर्शियल गैस सिलेंडर की कमी और महंगे दाम की वजह से रेस्तरां ने अपनी ‘मेनू कीमतों’ में 10-15% का इजाफा कर दिया है.
आने वाले दिनों में क्या होगा महंगा?
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि ईरान-इजरायल युद्ध अगले 15-20 दिनों तक और चला, तो स्थिति और विकराल हो सकती है.
खेती की लागत: खाद यानी फर्टिलाइजर संयंत्रों को गैस की सप्लाई कम होने से यूरिया और डीएपी के उत्पादन पर असर पड़ सकता है, जिससे खरीफ फसलों की लागत बढ़ेगी.
ऑटोमोबाइल: स्टील और प्लास्टिक महंगा होने से कारों और दोपहिया वाहनों की कीमतों में एक और दौर की बढ़ोतरी संभव है.
इलेक्ट्रॉनिक्स: लॉजिस्टिक्स और पैकेजिंग मटेरियल महंगा होने से फ्रिज, टीवी और वाशिंग मशीन की कीमतें 5-8% तक बढ़ सकती हैं.
भारत सरकार ने ‘नेचुरल गैस सप्लाई रेगुलेशन ऑर्डर 2026’ के तहत घरेलू रसोई गैस और उर्वरक क्षेत्र को प्राथमिकता दी है. पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने आश्वासन दिया है कि भारत ने अमेरिका, रूस और कनाडा जैसे देशों से वैकल्पिक सप्लाई सुनिश्चित की है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ी हुई कीमतों का बोझ उपभोक्ता पर ही पड़ता दिख रहा है. यूपी और बिहार जैसे राज्यों में प्रशासन को जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के सख्त निर्देश दिए गए हैं.
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