यह पानी कमरे से बाहर जाने के रास्ते की तरफ था। इतना ही नहीं। विधि के लापता होने पर उसे ढूंढ रहे लोगों ने बताया कि कमरे का दरवाजा बाहर की तरफ से बंद था। कुंडी लगी हुई थी। सबसे बड़ा सवाल यही था कि बंद कमरे के अंदर बच्ची कैसे पहुंची।
सपाल सिंह के इन सवालों से पुलिस का माथा ठनका। फोरेंसिक टीम को बुलाया गया। फॉरेंसिक एक्सपर्ट डॉ. नीलम ने बताया कि एक फुट का टब आधा ही पानी से भरा था। बच्ची का शव पानी में डूबा था। हाथ और पांव टब के बाहर थे। इतने कम पानी में बच्ची तभी डूब सकती है जब कोई डुबोए।
विरोधाभाषी बयानों में फंसती चली गई पूनम
खुद नहीं डूब सकती। बच्ची की चप्पल टब से कुछ दूरी पर थीं। अगर बच्ची खुद डूबी होती तो चप्पल दूर नहीं होतीं। या तो पैर में होतीं या पैर के पास ही होतीं। पूनम पर शक हो जाने के बाद पुलिस ने पूछताछ शुरू की तो वह विरोधाभाषी बयानों में फंसती चली गई। पहले कहा कि उसने विधि को देखा ही नहीं। बाद में बोली कि उसने विधि को ऊपर वाले कमरे की तरफ जाते हुए देखा था। इसी से उस पर शक गहरा गया। शादी में शामिल महिलाओं ने पुलिस को बताया कि बरात की विदाई के समय सभी महिलाएं घर से बाहर चली थीं।
पूनम घर के दरवाजे तक साथ आई लेकिन बिना किसी को कुछ बताए लौट गई। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज देखे तो महिलाओं की बात सत्य निकली। पूनम से इसका कारण पूछा तो कुछ नहीं बताया। इससे शक और गहराया। महिलाओं ने बताया कि बरात की विदाई के बाद वे जब लौटीं तो पूनम के कपड़े गीले थे। इसी आधार पर पुलिस उसे हिरासत में लेकर थाने चली गई।
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