डॉ. विनीता अरोड़ा हत्याकांड मामले में जिला अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए पांचों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है। यह पहला मौका है जब कोर्ट ने एक ही मामले में एकसाथ पांच दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई।
न्यायाधीश हेमराज की अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि दोषियों को तब तक फंदे पर लटकाया जाए जब तक उनकी मौत नहीं हो जाती। सजा सुनाए जाने के तुरंत बाद पांचों दोषियों को कड़ी सुरक्षा के बीच वैन से कुरुक्षेत्र जेल भेजा गया। इससे पहले चार दोषी कैथल जेल में बंद थे, जबकि पूनम पहले से ही कुरुक्षेत्र जेल में थी। साथ ही जिला अदालत ने फांसी की पुष्टि करने के लिए तुरंत फैसले की कॉपी हाईकोर्ट को भेज दी।
दोषियों की हाईकोर्ट पर नजर
न्यायाधीश ने मामले को रेयर ऑफ रेयरेस्ट केस मानते हुए कहा कि समाज में इसका स्पष्ट संदेश जाना चाहिए कि किसी भी नौकर द्वारा लूट के इरादे से की गई हत्या में फांसी की सजा हो सकती है। अब दोषियों के पास 60 दिनों का समय है कि वे इस फैसले को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दे सकते हैं।
51 गवाह पेश, 30 महीने चली सुनवाई
यह सनसनीखेज हत्याकांड नौ जनवरी 2023 को हुआ था, जिसने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया था। करीब 30 महीने चले ट्रायल में पुलिस ने 51 लोगों को गवाह बनाया। इनमें से 27 गवाहों की गवाही और ठोस सबूतों के आधार पर अदालत ने पांचों आरोपियों नौकरानी पूनम, उसके प्रेमी विक्रम उर्फ विक्की, विक्रमजीत उर्फ बिट्टू, सुनील कुमार और मनीष कुमार को दोषी ठहराया। मामले में घर के नौकर केत राम और हथियार आपूर्तिकर्ता उमेश को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया।
दोषी करार देने के लिए तीन दिन चली बहस…
15 दिसंबर को तीन दिन चली बहस के बाद अदालत ने पांचों आरोपियों को दोषी करार दिया था। उस दौरान सभी आरोपी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए थे। चार पुरुष आरोपी कैथल जेल से और पूनम कुरुक्षेत्र जेल से पेश हुए। चारों पुरुष दोषी आदतन अपराधी हैं और कैथल में उनके खिलाफ पहले से कई मामले दर्ज हैं।
डॉ. विनीता के पति डॉ. अतुल ने कहा-ऊपर वाले के घर देर है अंधेर नहीं
डॉ. विनीता अरोड़ा के पति डॉ. अतुल अरोड़ा शनिवार को सजा सुनाने के दौरान पूरे दिन अदालत परिसर में मौजूद रहे, लेकिन सजा की अंतिम घोषणा के समय वे बाहर दूसरे कमरे में चले गए। जब उन्हें फांसी की सजा की जानकारी मिली तो उनकी आंखें नम हो गईं। उन्होंने कहा कि विनीता की भरपाई तो नहीं हो सकती लेकिन अदालत के इस फैसले से उनके दिल को सुकून जरूर मिला है। उन्हें कानून पर पूरा भरोसा था और अब यह और भी बढ़ गया है।
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