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Avocado Cultivation in Kullu: हिमाचल में अब सिर्फ सेब की ही नहीं, बल्कि मक्खन फल यानी एवोकाडो की भी धूम मचने वाली है. कुल्लू के रहने वाले कॉलेज छात्र आयुष ने गिरते सेब के कारोबार के बीच एक ऐसा रास्ता निकाला है, जिसने सबको हैरान कर दिया है. महज 3 पेड़ों से 400 किलो फल और 25 हजार रुपये का मुनाफा कमाने वाले आयुष अब खुद घर की छत पर एवोकाडो की नर्सरी तैयार कर रहे हैं.
पुरानी यादों से मिला नया आइडिया
आयुष बताते हैं कि बदलते मौसम के कारण अब सेब और प्लम की फसल पहले जैसी नहीं रही. ऐसे में उन्हें अपने घर के पास लगे 8 साल पुराने एवोकाडो के पेड़ों से एक उम्मीद जागी. दरअसल, कुल्लू के गांधीनगर इलाके में रहने वाले कुछ विदेशी लोग कई साल पहले कनाडा और न्यूजीलैंड से ये पौधे लाए थे. आयुष ने देखा कि जब विदेशी पौधे यहां फल दे सकते हैं, तो क्यों न इसे बड़े स्तर पर किया जाए. बस यहीं से उन्होंने एवोकाडो का बगीचा तैयार करने की ठानी.
एवोकाडो की फसल में सेब से भी ज्यादा कमाई
आयुष के अनुसार, एवोकाडो का मार्केट सेब से कहीं ज्यादा फायदेमंद है. पिछले साल उन्होंने महज 3 पेड़ों से लगभग 400 किलो फल तोड़े. उन्होंने बताया कि मंडी में सेब की अच्छी वैरायटी भी मुश्किल से 80 रुपये किलो बिकती है, जबकि एवोकाडो उन्हें 180 से 250 रुपये प्रति किलो तक का दाम दिला रहा है. उन्होंने सिर्फ 100 किलो फल सीधे विदेशियों और मनाली के बाजारों में बेचकर 25 हजार रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाया है.
बागवानों के लिए नई उम्मीद
एवोकाडो के पेड़ को तैयार होने में 6 से 7 साल का समय लगता है और इसे लगाने का सबसे सही समय जुलाई का महीना होता है. आयुष अब सोशल मीडिया के जरिए अन्य बागवानों को भी जागरूक कर रहे हैं. हर दिन 10 से 15 लोग उनसे सलाह लेने के लिए संपर्क कर रहे हैं. आयुष का मानना है कि अगर कुल्लू के लोग ज्यादा संख्या में एवोकाडो लगाएंगे, तो पॉलिनेशन बेहतर होगा और आने वाले समय में कुल्लू दुनिया भर में एवोकाडो के लिए जाना जाएगा.
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सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें
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