भगवान रघुनाथ की नगरी कुल्लू में देश के बाकी हिस्सों से अलग, होली एक दिन पहले ही आज मना ली गई. चंद्रग्रहण के चलते होली जल्दी खेली गई. जिस तरह से ब्रज की होली देशभर में प्रसिद्ध है, उसके बाद दूसरे नंबर पर कुल्लू की होली मानी जाती है. लोग सालभर होली का इंतजार करते हैं. भगवान शिव, कृष्ण और विष्णु को गीतों के जरिए दिनभर याद किया जाता है. सालों से यहां इसी परंपरा का निर्वहन होता आया है. लोकल 18 से बबिता शर्मा कहती हैं कि वह ढालपुर से हर साल होली खेलने सुल्तानपुर आती हैं. उम्र में बड़े लोग अपने से छोटों के कंधे पर और सिर पर गुलाल डालकर आशीर्वाद देते हैं.
क्या छोटा-क्या बड़ा
ऋषभ मोदगिल ने बताया कि आज सुल्तानपुर में होली का दूसरा दिन मनाया गया. होली इस घाटी का सबसे उत्कृष्ट और खुशनुमा त्यौहार है. यहां सब लोग मिल जुल कर इस त्यौहार को मनाते हैं. सभी उम्र के लोग एक-दूसरे के साथ होली खेलते हैं. पूरा दिन गाना गाकर, सभी घरों में जाकर, मिल जुल कर इस त्यौहार को मनाया जाता है.
संजय शर्मा में बताया कि यहां होली के दिन न सिर्फ पारंपरिक गीतों का गायन होता है बल्कि घर-घर में पारंपरिक व्यंजन भी बनाए जाते हैं. जहां लोग परस्पर मिलकर होली खेलते हैं. यहां होली के दौरान गीतों के जरिए भगवान की स्तुति की जाती है. भगवान शिव, कृष्ण और विष्णु को गीतों के जरिए दिनभर याद किया जाता है. सालों से यहां इसी परंपरा का निर्वहन होता आया है. बबिता शर्मा ने बताया कि वह ढालपुर से हर साल होली खेलने सुल्तानपुर आती हैं. यहां होली के दौरान घर-घर जाया जाता है. अंशुल पराशर ने बताया कि होली पर बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लेने के लिए पहुंचा जाता है. लोग एक दूसरों के चेहरे पर गुलाल लगाते हैं. बुजुर्गों के पैरों पर गुलाल डाला जाता है. जबकि उम्र में बड़े लोग अपने से छोटों के कंधे पर और सिर पर गुलाल डाल कर आशीर्वाद देते हैं.
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Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें
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