इस अनिश्चितता के बीच, कुल्लू में अचानक ‘इंडक्शन चूल्हों’ की मांग में सुनामी आ गई है, जिससे दुकानदारों के पास स्टॉक कम पड़ने लगा है. जी हां… कुल्लू जिले में बीते तीन दिनों के अंदर इंडक्शन चूल्हों की बिक्री में करीब 20 प्रतिशत तक वृद्धि होई है.
कुल्लू में गैस की किल्लत और नए नियमों का खौफ
वहीं, दूसरी ओर कुल्लू जिले में व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की आपूर्ति लगभग ठप हो गई है. प्रशासन और गैस एजेंसियों ने घरेलू सिलेंडरों के वितरण के लिए नए कड़े नियम लागू कर दिए हैं, जिससे उपभोक्ता अब बेहद किफायत से गैस खर्च करने को मजबूर हैं. लोगों को डर है कि आने वाले दिनों में स्थिति और भी गंभीर हो सकती है, इसी डर ने उन्हें वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की ओर धकेल दिया है.
इंडक्शन चूल्हों की बिक्री में 2000% का उछाल
कुल्लू के सरवरी क्षेत्र और मुख्य बाजारों में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की दुकानों पर अब गैस चूल्हों से ज्यादा इंडक्शन स्टोव की पूछताछ हो रही है. व्यापारी प्रदीप शर्मा के अनुसार, ‘पहले दिन भर में मुश्किल से 1 या 2 इंडक्शन बिकते थे, लेकिन अब यह आंकड़ा बढ़कर 20 से 30 तक पहुंच गया है.’ यानी बिक्री में सीधे तौर पर 20 गुना की वृद्धि दर्ज की गई है.
सबसे ज्यादा खरीदारी वे छात्र और कामकाजी लोग कर रहे हैं जो कुल्लू में किराए के कमरों में रहते हैं. गैस सिलेंडर न मिलने की स्थिति में उनके पास बिजली से चलने वाले ये चूल्हे ही एकमात्र सहारा बचे हैं.
उत्पादन में तेजी, फिर भी सप्लाई अधूरी
बढ़ती मांग को देखते हुए स्थानीय स्तर पर इंडक्शन चूल्हे तैयार करने वाले कारोबारियों ने अपनी प्रोडक्शन क्षमता कई गुना बढ़ा दी है. कुल्लू के उद्यमी गौरव सोफत ने बताया कि पहले उनका उद्योग प्रतिदिन 20 से 30 घरेलू इंडक्शन तैयार करता था, लेकिन अब मांग को देखते हुए वे रोजाना 100 से अधिक यूनिट्स बना रहे हैं. हालांकि, समस्या केवल मांग की नहीं है, बल्कि कच्चे माल की भी है.
दरअसल, इंडक्शन चूल्हे बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले स्पेयर पार्ट्स बाहरी राज्यों से आते हैं. देशव्यापी मांग बढ़ने के कारण अब यह सामान कुल्लू नहीं पहुंच पा रहा है. सप्लाई चेन टूटने की वजह से सप्लायर्स ने इंडक्शन के दामों में 200 से 300 रुपये तक की बढ़ोतरी भी कर दी है.
कमर्शियल सेक्टर में मचा हाहाकार
सबसे खराब स्थिति पर्यटन कारोबार से जुड़े होटल और रेस्टोरेंट संचालकों की है. कुल्लू में व्यावसायिक गैस सिलेंडर की सप्लाई बंद होने से अब बड़े होटलों ने भी भारी-भरकम ‘कमर्शियल इंडक्शन’ का रुख किया है. गौरव सोफत के मुताबिक, ‘जहां साल भर में केवल 3 से 5 कमर्शियल इंडक्शन बिकते थे, वहीं पिछले महज तीन दिनों में 50 से अधिक यूनिट्स की डिमांड आ चुकी है.’
फैक्ट्रियों में अब दिन-रात कमर्शियल इंडक्शन तैयार किए जा रहे हैं ताकि जिले की खाद्य व्यवस्था को चालू रखा जा सके. यदि गैस संकट जल्द हल नहीं हुआ, तो आने वाले समय में होटलों के मेन्यू कार्ड पर भी महंगाई का असर दिखना तय है.
क्या इंडक्शन बनेगा स्थायी विकल्प?
फिलहाल कुल्लू के बाजारों में घरेलू इंडक्शन चूल्हों का स्टॉक लगभग खत्म होने की कगार पर है. लोग डर रहे हैं कि अगर युद्ध लंबा खिंचा तो बिजली के उपकरणों के दाम भी आसमान छूने लगेंगे. लोग न केवल इंडक्शन खरीद रहे हैं, बल्कि बिजली के अन्य विकल्पों जैसे इलेक्ट्रिक केतली और हॉट प्लेट्स पर भी नजरें टिकाए हुए हैं. प्रशासन की ओर से अभी गैस आपूर्ति को लेकर कोई स्पष्ट बयान नहीं आया है, जिससे जनता के बीच अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है.
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