Home mango garden success story : रामरतन के बगीचे में तोतापल्ली, बैगनफली, लंगड़ा, दशहरी सहित देश‑विदेश के प्रमुख आम‑वर्गीकरण वाले पेड़ लगे हुए हैं. हर साल मार्च से अगस्त तक इन पेड़ों पर भरपूर फल लगते हैं, जिससे न केवल परिवार के बच्चों को बल्कि पड़ोसी, परिवार और रिश्तेदारों और परिचितों को भी मीठी खुशी मिलती है.
दो दर्जन से अधिक पेड़‑प्रजातियों के साथ एक समृद्ध
प्रारम्भ में बस कुछ ही पौधों से शुरू किया गया यह बगीचा, अब दो दर्जन से अधिक पेड़‑प्रजातियों के साथ एक समृद्ध बाग बन चुका है. रामरतन के बगीचे में तोतापल्ली, बैगनफली, लंगड़ा, दशहरी सहित देश‑विदेश के प्रमुख आम‑वर्गीकरण वाले पेड़ लगे हुए हैं. हर साल मार्च से अगस्त तक इन पेड़ों पर भरपूर फल लगते हैं, जिससे न केवल परिवार के बच्चों को बल्कि पड़ोसी, परिवार और रिश्तेदारों और परिचितों को भी मीठी खुशी मिलती है.
उर्वरता बढ़ाने के लिए जैविक खाद का प्रयोग
बगीचा तैयार करने में रामरतन ने कई पहलुओं पर खास ध्यान दिया.सबसे पहले उन्होंने मिट्टी की जाच परख कर उसकी उर्वरता बढ़ाने के लिए जैविक खाद का प्रयोग किया फिर पौधों को रोपित किया, जिससे एक ही बगीचे में विभिन्न स्वाद, मिठास और रंगों की विविधता आई. इस विविधता ने फलन की अवधि को भी लम्बा कर दिया कुछ पेड़ मार्च अप्रैल में फल देते हैं, तो कुछ जुलाई अगस्त में अपनी पीक तक पहुचते हैं.
आज रामरतन का बगीचा न केवल घर में आम घर बना है, बल्कि स्थानीय किसानों के लिए एक प्रेरणा स्रोत भी बन गया है. उन्होंने अपने अनुभव को साझा कर कहा की जब बच्चों को घर में उगाए आमों की खुशबू और स्वाद मिलते हैं, तो उनका लगाव और भी गहरा हो जाता है.
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7 वर्षों से पत्रकारिता में अग्रसर. इलाहबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नालिस्म की पढ़ाई. अमर उजाला, दैनिक जागरण और सहारा समय संस्थान में बतौर रिपोर्टर, उपसंपादक औऱ ब्यूरो चीफ दायित्व का अनुभव. खेल, कला-साह…और पढ़ें
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