झुमरीतिलैया में जन्मी श्रुति मोदी ने UPSC सिविल सर्विसेज परीक्षा में 569वीं रैंक हासिल किया. दिल्ली में पढ़ाई करने वाली श्रुति ने बैंक की नौकरी के साथ रोज 6-7 घंटे पढ़ाई की और सफलता हासिल की. उन्होंने बताया कि बचपन में उनके नाना ने एक बार टीवी पर कैबिनेट सेक्रेटरी को दिखाते हुए उन्हें यूपीएससी के बारे में बताया था. उसी समय से उनके मन में सिविल सेवा के प्रति एक अलग तरह का आकर्षण पैदा हो गया.
इस दौरान पूरे इलाके में खुशी और गर्व का माहौल देखने को मिला. विशेष बातचीत में श्रुति मोदी ने अपनी सफलता की कहानी साझा करते हुए बताया कि उनकी यह उपलब्धि उन्हें अपने पांचवें प्रयास में मिली है. उन्होंने कहा कि यह सफर आसान नहीं था. लेकिन लगातार मेहनत, संघर्ष और परिवार के सहयोग से उन्होंने यह मुकाम हासिल किया है.
बेरोजगारी जैसे समस्याओं के समाधान का माध्यम है यूपीएससी
श्रुति ने बताया कि उनके पिता दिल्ली में एक प्राइवेट अकाउंटेंट के रूप में कार्यरत हैं और उनके जन्म के बाद से ही पूरा परिवार दिल्ली में रह रहा है. उनकी प्रारंभिक शिक्षा से लेकर ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई दिल्ली के विभिन्न शिक्षण संस्थानों से हुई. साल 2020 में उन्होंने कॉमर्स विषय से ग्रेजुएशन पूरा किया. श्रुति ने बताया कि दसवीं और ग्यारहवीं कक्षा के दौरान ही उन्हें समाज की कई समस्याओं के बारे में समझ आने लगा था. उन्होंने देखा कि समाज में बेरोजगारी, अशिक्षा और महिलाओं की साक्षरता जैसी कई गंभीर समस्याएं मौजूद हैं. तभी उनके मन में यह भावना आई कि यदि वे इन समस्याओं को दूर करने में अपना योगदान देना चाहती हैं. तो उसके लिए सिविल सेवा एक बेहतर माध्यम हो सकता है.
10 से 5 बजे तक बैंक में काम के दौरान जारी रखी तैयारी
उन्होंने बताया कि साल 2022 में उनका प्रिलिम्स परीक्षा पास हो गया था. लेकिन मेंस परीक्षा में सफलता नहीं मिल सकी. इस दौरान उन्होंने भविष्य की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्टेट बैंक में एसोसिएट कैपेसिटी में नौकरी शुरू कर दी. बैंक में उनकी ड्यूटी सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक रहती थी. लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी.
श्रुति ने बताया कि वे रोज सुबह जल्दी उठकर सुबह 5 बजे से 8 या 9 बजे तक सेल्फ स्टडी करती थी. इसके बाद बैंक के लिए निकल जाती थी और शाम को करीब 5:30 या 6 बजे घर लौटकर फिर से पढ़ाई में जुट जाती थी. इस तरह वे रोजाना कुल मिलाकर लगभग 6 से 7 घंटे पढ़ाई करती थी. उन्होंने कहा कि तैयारी के दौरान उन्होंने अपने बनाए हुए नोट्स पर विशेष ध्यान दिया और लगातार उसी का रिवीजन करती रहीं. इसी रणनीति के कारण उनकी विषयों पर पकड़ मजबूत होती चली गई.
नाना ने टीवी पर कैबिनेट सेक्रेटरी को दिखाकर किया था प्रेरित
उन्होंने बताया कि बचपन में उनके नाना ने एक बार टीवी पर कैबिनेट सेक्रेटरी को दिखाते हुए उन्हें यूपीएससी के बारे में बताया था. उसी समय से उनके मन में सिविल सेवा के प्रति एक अलग तरह का आकर्षण पैदा हो गया. श्रुति ने बताया कि साल 2023 में जब उन्हें लगातार सफलता नहीं मिल रही थी तो वे काफी निराश हो गई थीं और उन्हें लगा कि शायद अब उनसे यह संभव नहीं हो पाएगा. लेकिन अपने लक्ष्य को याद करते हुए उन्होंने दोबारा से हिम्मत जुटाई और नई ऊर्जा के साथ तैयारी शुरू कर दी.
उन्होंने कहा कि आज यूपीएससी ऐसे अभ्यर्थियों का चयन कर रही है जो कठिन परिस्थितियों का डटकर सामना कर सकें. उन्होंने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि यदि कोई भी छात्र अपना लक्ष्य स्पष्ट रखे और बेहतर रणनीति के साथ लगातार मेहनत करता रहे, तो सफलता जरूर मिलती है.
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