कोडरमा जिले के राष्ट्रीय पदक विजेता राहुल कुमार यादव ने भारतीय सेना के आर्मी एयर डिफेंस में खेल कोटे से चयनित होकर नया कीर्तिमान स्थापित किया है.वह कोडरमा जिले के पहले कुश्ती खिलाड़ी बन गए हैं
किसान परिवार से निकला जुझारू पहलवान
राहुल का सफर साधारण नहीं रहा. वह किसान सीता राम यादव और गृहणी पार्वती देवी के पुत्र हैं. सीमित संसाधनों के बावजूद उनके भीतर खेल के प्रति अटूट जुनून था. वर्ष 2017 में उन्होंने कोडरमा जिला कुश्ती संघ के सचिव एवं एन.आई.एस. राष्ट्रीय कुश्ती कोच आकाश कुमार सेठ के मार्गदर्शन में अभ्यास की शुरुआत की. हर दिन उरवां से तिलैया तक 14 किलोमीटर साइकिल चलाकर पहुंचना उनके लिए आसान नहीं था. लेकिन हिम्मत और सपनों ने उन्हें कभी पीछे नहीं हटने दिया. दूरी का सामना करते-करते जब समस्या बढ़ी, तो 2018 में उन्होंने कुश्ती संघ के कार्यालय में ही रहकर पूर्ण समर्पण के साथ अभ्यास जारी रखा.
राज्य से राष्ट्रीय स्तर तक बेहतर प्रदर्शन
उन्होंने राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में कई स्वर्ण पदक जीते. इन्हीं उपलब्धियों के आधार पर उन्हें राष्ट्रीय कुश्ती प्रतियोगिता में हिस्सा लेने का मौका मिला. जहां उन्होंने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए झारखंड का प्रतिनिधित्व किया. राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने के बाद उन्हें झारखंड सरकार से ₹75,000 की छात्रवृत्ति भी प्रदान की गई. उनकी लगन और निरंतर प्रगति को देखते हुए उनका चयन हरियाणा के हिसार स्थित साई सेंटर में हुआ. यहां चार वर्षों तक उन्होंने उच्चस्तरीय प्रशिक्षण प्राप्त किया. इस दौरान उन्हें अज़रबैजान सहित कई देशों में विशेष कुश्ती प्रशिक्षण हासिल करने के अवसर मिले, जिसने उनके खेल कौशल को और निखारा.
आर्मी एयर डिफेंस में हुआ चयन
अपने राष्ट्रीय पदक की उपलब्धियों के आधार पर राहुल ने सितंबर 2024 में भारतीय सेना के आर्मी एयर डिफेंस के लिए ट्रायल दिया. ट्रायल में शानदार प्रदर्शन करते हुए उन्हें खेल कोटे से सेना में चयनित किया गया. राहुल ने 1 मई 2025 से 3 दिसंबर 2025 तक ओडिशा स्थित आर्मी एयर डिफेंस सेंटर में कड़ी ट्रेनिंग पूरी की. सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूरा करने के बाद अब वे सेना का हिस्सा बन चुके हैं. जो कोडरमा के लिए गर्व की बात है.
मेहनत ने बनाया राहुल को मिसाल
राहुल की सफलता पर उनके गुरु और जिला कुश्ती संघ के सचिव आकाश कुमार सेठ ने गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि राहुल ने साबित कर दिया कि कठिन मेहनत, अनुशासन और लगन से कुछ भी संभव है. किसान परिवार का यह लड़का रोज 14 किलोमीटर साइकिल चलाकर अभ्यास करता था, लेकिन कभी थका नहीं, कभी रुका नहीं. आज वह सेना में जाकर पूरे जिले का नाम रोशन कर रहा है. मुझे विश्वास है कि वह देश सेवा में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन करेगा.
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