किशनगंज में प्रस्तावित नए सेना कैंप के लिए कृषि भूमि अधिग्रहण पर पुनर्विचार की मांग को लेकर एक प्रतिनिधिमंडल ने उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा से मुलाकात की। यह ज्ञापन एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष सह अमौर विधायक अख्तरुल इमान के नेतृत्व में सौंपा गया। यह कैंप भारत-नेपाल और बांग्लादेश सीमा की सुरक्षा मजबूत करने के लिए कोचाधामन और बहादुरगंज अंचल में 200 से 250 एकड़ जमीन पर बनाया जाना है। सैन्य परियोजना के लिए सतभीट्टा, सकोर और नटुआ पाड़ा मौजा में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है। अधिग्रहण से सैकड़ों किसान भूमिहीन हो जाएंगे
विधायक अख्तरुल इमान ने बताया कि इस अधिग्रहण से सैकड़ों किसान भूमिहीन हो जाएंगे, जिनकी आजीविका खेती पर निर्भर करती है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि प्रस्तावित भूखंड पर कुछ किसानों के घर, ईदगाह और कब्रिस्तान भी स्थित हैं। स्थानीय किसानों ने आशंका जताई है कि भूमि अधिग्रहण होने पर उन्हें भुखमरी और पलायन का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से मांग की है कि सेना कैंप के लिए ऐसी जगह का चयन किया जाए, जहां बिहार सरकार की अपनी जमीन उपलब्ध हो। इस अवसर पर विधायक अख्तरुल इमान के साथ जदयू नेता शकील अख्तर, नटुआ पाड़ा पंचायत के मुखिया रफीक आलम, पंचायत समिति सदस्य प्रतिनिधि अंजार आलम, वसीद आलम और गुलाम मुस्तफा सहित अन्य जनप्रतिनिधि भी मौजूद थे।
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