Khargone Holi News: इस नजारे को देख हर कोई दंग रह जाता है. इस साल भी भारी भरकम गाढ़ा खींचने की यह परंपरा 3 मार्च को धुलंडी के दिन निभाई जाएगी. यह आयोजन करीब 900 साल से भी ज्यादा समय से लगातार चला आ रहा है. इस दिन न सिर्फ गाढ़ा खींचा जाता है, बल्कि हल्दी की होली भी खेली जाएगी.
इस दिन न सिर्फ गाढ़ा खींचा जाता है, बल्कि हल्दी की होली भी खेली जाएगी. बता दें कि कसरावद में होली के दिन रंग गुलाल उड़ाने के बाद शाम 7 बजे होने वाला यह आयोजन बड़ा खास माना जाता है. जिस भारी भरकम गाढ़े को दस लोग मिलकर भी हिला नहीं पाते, उसे 71 साल के श्रीराम यादव (शेरू) अकेले ही खींचेंगे. इस आयोजन में यादव और पाटीदार समाज की खास भूमिका होती है. यादव समाज गाढ़ा खींचने वाले व्यक्ति यानी बड़वा को तैयार करता है, जबकि पाटीदार समाज गाढ़ा बनाता है. इसकी तैयारियां जोरों पर चल रही है.
नजारा देख दंग रह जाएंगे!
गांव के राकेश पाटीदार बताते हैं कि इस गाढ़े को खास तरीके से तैयार किया जाता है. इसमें लकड़ी और लोहे के 7 बड़े पहिए लगाए जाते हैं. जो कई वर्ष पुराने हैं. इसका वजन करीब 10 टन तक माना जाता है. इतना ही नहीं, गाढ़े पर कई लोग खड़े भी रहते हैं, जिससे इसका वजन और बढ़ जाता है. इसके बावजूद इसे एक व्यक्ति द्वारा खींचना लोगों को हैरान कर देता है. हालांकि, यह उत्सव एकादशी से ही शुरू हो जाता है और धुलंडी तक बढ़वा बैठक करके लोगों की समस्याओं का निवारण करते हैं.
खंडोबा महाराज से जुड़ी मान्यता
गाढ़ा खींचने वाले श्रीराम यादव दावा करते है कि, उन्हें खंडोबा महाराज और पीर बाबा की सवारी आती है. लोग उन्हें बढ़वा कहते है. चार दिनों तक वह रोजाना बैठक करते है, जिसमें दूर-दूर से हिंदू मुस्लिम दोनों समुदाय के लोग उनके दुख तकलीफें लेकर आते है. जिनका वे समाधान करते है. फिर आखरी दिन धुलंडी की शाम को गाढ़ा खींचने का आयोजन होता है. उस दौरान उनके शरीर में खंडोबा महाराज खुद आते है और गाढ़ा खींचतकर उनकी उपस्थिति दर्ज कराते है.
निभाई जाती है पारंपरिक रस्में
वे कहते हैं कि गांव में स्थित खंडोबा मंदिर से यह प्राचीन यात्रा शुरू होती है. इस दौरान गांव के लोग उन्हें कंधे पर उठाकर पहले पूरे गांव में घुमाते हैं. यात्रा के दौरान लोग सिर पर पटिया और हाथ में तलवार लेकर आगे चलते हैं, पीछे बड़वा छड़ी घुमाते हुए आगे बढ़ते हैं. यहां वे गाढ़ा के पास जाते हैं, तब पांच महिलाएं पारंपरिक निमाड़ी गीतों को गाते हुए बड़वा और गाढ़ा को हल्दी के छापे लगाती हैं. बची हुई हल्दी से होली खेली जाती है. मान्यता है कि इस हल्दी से रोग दूर होते हैं और जीवन में सुख-शांति आती है. इस रस्म के बाद गाढ़ा खींचने की प्रक्रिया शुरू होती है और बड़वा के हाथ लगाते ही गाढ़ा तेज रफ्तार से दौड़ने लग जाता है.
About the Author
एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.