हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के धर्मशाला के ‘स्मार्ट रोड’, जिसे स्मार्ट सिटी मिशन के तहत 21 करोड़ रुपए की लागत से बनाया गया था, अब वीआईपी कब्जों का शिकार हो गई है। यह सड़क वरिष्ठ नागरिकों और युवाओं के लिए सुरक्षित पैदल व साइक्लिंग ट्रैक उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार की गई थी। हालांकि, अब यह रसूखदारों की निजी जागीर बन गई है। मैक्स मेक्स मॉल के सामने स्थित इस कॉरिडोर पर पैदल चलने वालों के लिए बनी जगह पर आलीशान गाड़ियां खड़ी रहती हैं। रसूखदारों ने लोहे की चेनें लगाकर सार्वजनिक रास्ते को अपनी निजी पार्किंग में बदल दिया है। सुगम यातायात के लिए बनाया था यह मार्ग प्रदूषण मुक्त आवाजाही और सुगम यातायात के लिए बनाया गया था, लेकिन यहां लगे ‘नो पार्किंग’ के बोर्ड अब केवल औपचारिकता बनकर रह गए हैं। अवैध कब्जों को हटाने के लिए स्मार्ट सिटी प्रशासन और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के बीच जिम्मेदारी को लेकर खींचतान जारी है। स्मार्ट सिटी के एसडीओ केवल शर्मा ने बताया कि उन्होंने 10 मीटर चौड़ी सड़क को 14 मीटर चौड़ा करके पीडब्ल्यूडी को सौंप दिया है। उनके अनुसार, अब अतिक्रमण हटाना नगर निगम और पीडब्ल्यूडी की जिम्मेदारी है। सड़क पर चलना, जान जोखिम में डालने जैसा वहीं, नगर निगम की डिप्टी मेयर तेजिंदर कौर ने स्वीकार किया कि यह सड़क उनके वार्ड में है और अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, जमीनी स्तर पर अब तक किसी भी रसूखदार के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। एक 68 वर्षीय सेवानिवृत्त टीचर का कहना है कि सुरक्षित टहलने की उम्मीद में वे यहां आते थे, लेकिन अब गाड़ियों के जमावड़े और रसूखदारों की धौंस के कारण सड़क पर चलना भी जान जोखिम में डालने जैसा है। साइकिल सवारों के लिए बना ट्रैक अब दुर्घटनाओं का जोन बन चुका है क्योंकि वहां व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का सामान फैला रहता है। प्रशासन के पास अतिक्रमणकारियों की पूरी सूची एक ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, प्रशासन के पास अतिक्रमणकारियों की पूरी सूची मौजूद है। हालांकि, कार्रवाई शुरू होते ही राजनीतिक दबाव के कारण फाइलें रोक दी जाती हैं। इस स्थिति का खामियाजा शहर के बुजुर्गों को भुगतना पड़ रहा है, जिन्हें पैदल चलने के लिए सुरक्षित जगह नहीं मिल पा रही है।
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