कांगड़ा जिले में साइबर ठगों ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर एक डॉक्टर से 36 लाख रुपये की ठगी की है। यह घटना जिले में पिछले दो महीनों के दौरान सामने आए चार बड़े साइबर धोखाधड़ी मामलों में से एक है, जिनमें कुल 2.21 करोड़ रुपये से अधिक की चपत लगी है। पुलिस के अनुसार, ठगों ने पिछले नवंबर में डॉक्टर से संपर्क किया। वीडियो कॉल और फोन कॉल के माध्यम से खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बताते हुए उन्होंने डॉक्टर को मनी लॉन्ड्रिंग और अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध से जुड़े एक गंभीर मामले में फंसाने की धमकी दी। डिजिटल अरेस्ट कर ठगे 36 लाख रुपये ठगों ने डॉक्टर को गिरफ्तारी से बचाने के नाम पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा और किसी से भी बात न करने की हिदायत दी। इस मानसिक दबाव के चलते डॉक्टर ने दो अलग-अलग ऑनलाइन लेनदेन के जरिए 36 लाख रुपये ठगों के खातों में ट्रांसफर कर दिए।ठगी का एहसास होने पर पीड़ित डॉक्टर ने इस जनवरी में साइबर क्राइम थाना धर्मशाला में शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। चार बड़े मामले आए सामने जनवरी और फरवरी के दौरान जिले में साइबर ठगी के कुल चार बड़े मामले सामने आए हैं। इनमें डॉक्टर से हुई 36 लाख रुपये की ठगी के अलावा, 50.74 लाख रुपये, 40 लाख रुपये और 94,80,924 रुपये के तीन अन्य मामले शामिल हैं।इनमें से तीन मामले फर्जी निवेश (इन्वेस्टमेंट फ्रॉड) से संबंधित हैं, जबकि अन्य धोखाधड़ी व्हाट्सऐप ग्रुप और नकली ऐप के जरिए की गई हैं। साइबर ठग सोशल मीडिया का भी इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे रचा गया निवेश का जाल ठगों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए पीड़ितों से संपर्क किया। पहले दोस्ती बढ़ाई गई, फिर व्हाट्सऐप ग्रुप में जोड़ा गया, जहां रोजाना “मुनाफे के स्क्रीनशॉट” साझा किए जाते थे। इसके बाद एक फर्जी निवेश एप डाउनलोड करवाया गया, जिसमें निवेश करने पर रकम बढ़ती दिखाई देती रही। कई लोगों ने कर्ज लेकर किए ट्रांसफर जब पीड़ितों ने पैसे निकालने की कोशिश की तो ठगों ने टैक्स, प्रोसेसिंग फीस और वेरिफिकेशन चार्ज के नाम पर और रकम जमा करवाने को कहा। कई पीड़ितों ने मुनाफे के लालच में रिश्तेदारों से उधार लेकर भी पैसे ट्रांसफर कर दिए। पुलिस ने की लोगों से अपील पुलिस ने लोगों से सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा है की किसी भी अनजान कॉल, वीडियो कॉल या मैसेज पर भरोसा न करें, कोई भी एजेंसी फोन पर डिजिटल अरेस्ट नहीं करती।निवेश से पहले कंपनी और एप की सत्यता जांचें।किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर सूचना दें या नजदीकी पुलिस थाना/साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराएं। क्या है ‘डिजिटल अरेस्ट’ फ्रॉड इस तरीके में ठग खुद को सीबीआई, ईडी, पुलिस या कस्टम अधिकारी बताकर पीड़ित को ऑनलाइन निगरानी में होने का डर दिखाते हैं। पीड़ित को घर में ही रहने, किसी से बात न करने और तुरंत पैसे ट्रांसफर करने का दबाव बनाया जाता है।
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