माध्यमिक शिक्षा निदेशालय की उल्लास योजना के तहत निरक्षरों को साक्षर बनाने में रोहतक प्रदेश में तीसरे पायदान पर चल रहा है। शिक्षा विभाग ने निरक्षरों को साक्षर बनाने के लिए तीन साल का टारगेट दिया है। इसमें कैथल ने 85 प्रतिशत लक्ष्य पूर करके पहले तो सिरसा 26 प्रतिशत के साथ अंतिम पायदान पर है। रोहतक की बात की जाए तो 81 प्रतिशत लक्ष्य पूरा करके तीसरे स्थान पर है।
नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत हरियाणा माध्यमिक निदेशालय ने वर्ष 2023 में उल्लास योजना के तहत प्रदेश के 9 लाख निरक्षरों को साक्षर बनाने का लक्ष्य रखा था। रोहतक को तीन साल में 31,469 निरक्षरों को साक्ष्य बनाने का लक्ष्य मिला है। इसमें विभाग के वॉलंटियर और कर्मचारियों ने अब तक 25,426 निरक्षरों को पढ़ाकर परीक्षा में शामिल किया है।
हालांकि, जिलास्तर पर 27,771 निरक्षरों का पंजीकरण किया गया है। उल्लास समन्वयक ने बताया कि पंजीकृत निरक्षकों को प्रथम चरण के तहत गिनती और हिंदी में लिखना-पढ़ाना सिखाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि निरक्षकों के लिए तीन पेपर हैं और तीनों अनिवार्य हैं।
निरक्षरों तक पहुंचने में कैथल सबसे आगे
कैथल को 50,067 निरक्षरों का लक्ष्य मिला है। इसमें जिलास्तर पर विभाग की टीम ने तीन साल में 42,756 निरक्षरों को पढ़ाकर परीक्षा का हिस्सा बना चुका है जबकि सिरसा को 60,444 का लक्ष्य मिला है मगर वह अभी तक 15,769 की ही परीक्षा ले सका है। इतना ही नहीं वह 37,888 निरक्षरों का अभी तक पंजीकरण करवा पाया है।
अधिकारी के अनुसार
मुख्यालय से मिले लक्ष्य के अनुसार जिले के वॉलंटियर और कर्मचारी लगातार काम कर रहे हैं। मार्च-2026 की परीक्षा के लिए भी पंजीकरण प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। -इला, उल्लास एसएनए समन्वयक।
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