झारखंड पुलिस में अनुसंधान (इन्वेस्टिगेशन) कार्य करने वाले पुलिस पदाधिकारियों को अब सरकारी योजना के तहत स्मार्टफोन उपलब्ध कराया जाएगा। इस संबंध में पुलिस मुख्यालय ने पहले जारी दिशा-निर्देशों में संशोधन करते हुए नया आदेश जारी किया है। पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि कार्यालय उपकरण मद के तहत अनुसंधान कार्य में उपयोग के लिए मोबाइल फोन खरीदने की राशि उपलब्ध कराई गई है। इससे पहले 17 मार्च 2025 को जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार नया मोबाइल फोन केवल उन्हीं अनुसंधानकर्ताओं को देने का प्रावधान था, जिनकी सेवा अवधि चार वर्ष से अधिक शेष हो। साथ ही यह भी शर्त थी कि पिछले दो वर्षों से अनुसंधान कार्य में संलग्न नहीं रहने वाले या वर्तमान में अनुसंधानकर्ता नहीं रहने वाले पदाधिकारियों को इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा। हालांकि कई जिलों से यह सूचना मिली थी कि इन शर्तों के कारण बड़ी संख्या में अनुसंधानकर्ता इस योजना का लाभ नहीं ले पा रहे थे। इसे देखते हुए पुलिस मुख्यालय ने नियमों में संशोधन किया है। नए आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जिन अनुसंधानकर्ताओं की सेवा अवधि छह माह से कम शेष है, उन्हें यह सुविधा नहीं मिलेगी। वहीं स्थानांतरण, स्वैच्छिक या अनिवार्य सेवानिवृत्ति की स्थिति में मोबाइल फोन संबंधित शाखा में जमा कराना होगा। इसके बाद अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लेना अनिवार्य होगा। इसके अलावा मोबाइल फोन के प्रतिस्थापन या हस्तांतरण की स्थिति में उसकी डेप्रिसिएशन वैल्यू (मूल्यह्रास) की गणना निर्धारित प्रावधानों के अनुसार की जाएगी। पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि 17 मार्च 2025 को जारी पूर्व दिशा-निर्देशों को इसी सीमा तक संशोधित माना जाएगा, जबकि बाकी सभी निर्देश पहले की तरह प्रभावी रहेंगे।
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