झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के सातवें दिन गुरुवार को सदन में कृषि बजट पर जोरदार और तीखी चर्चा हुई। सत्ता पक्ष ने इसे किसानों को राहत देने वाला और कृषि क्षेत्र को मजबूत करने वाला कदम बताया, जबकि विपक्ष ने इसे महज आंकड़ों का खेल करार देते हुए सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए। भाजपा विधायक एवं मुख्य सचेतक नवीन जायसवाल ने कृषि बजट की आलोचना करते हुए कहा कि बड़ी बजट राशि घोषित करने मात्र से विकास सुनिश्चित नहीं होता। उन्होंने बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष में कृषि विभाग के लिए 1055 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था, लेकिन उसमें से केवल 362 करोड़ रुपये ही खर्च हुए, जबकि करीब 500 करोड़ रुपये सरेंडर कर दिए गए। उन्होंने बताया कि कृषि, पशुपालन और सहकारिता विभाग के खर्च का आंकड़ा देखें तो आवंटित 4000 करोड़ रुपये में से 31 जनवरी 2025 तक मात्र 1443 करोड़ रुपये यानी लगभग 36 प्रतिशत राशि ही खर्च हो सकी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब योजनाओं पर राशि खर्च ही नहीं हो पा रही तो 5000 करोड़ रुपये का बजट दिखाने का क्या औचित्य है। साथ ही चुनाव के दौरान किसानों से किए गए 3200 रुपये प्रति क्विंटल धान खरीद के वादे को पूरा न करने का आरोप भी लगाया।
कांग्रेस का पलटवार और बजट का समर्थन
कांग्रेस विधायक दल के उप नेता राजेश कच्छप ने कटौती प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सरकार का समर्थन करते हुए विपक्ष पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा जवान और किसान के हितों के साथ खड़ी रही है। किसान खेतों में खून-पसीना बहाकर देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करते हैं, इसलिए उनकी आय और सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि किसानों को बड़े औद्योगिक घरानों के दबाव में खेती करने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए।
राजेश कच्छप ने कृषि बजट को किसानों के लिए राहतकारी बताते हुए कहा कि झारखंड की मिट्टी और जलवायु कृषि के लिए अनुकूल है। राज्य में महुआ, जड़ी-बूटी, आम, अमरूद, धान, गेहूं और मक्का की अच्छी पैदावार होती है। उन्होंने मछली उत्पादन में राज्य की प्रगति पर संतोष जताया और भविष्य में निर्यात की संभावनाओं का जिक्र किया। साथ ही पशुपालन और डेयरी क्षेत्र में सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की भी सराहना की।
झामुमो विधायक ने भी किया समर्थन
इस दौरान झामुमो विधायक मथुरा महतो ने भी कृषि बजट का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि झारखंड केवल खनिज संपदा वाला राज्य नहीं है, बल्कि कृषि और वन संपदा से भी समृद्ध है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष अच्छी वर्षा के कारण फसल उत्पादन बेहतर हुआ है। रांची और खूंटी क्षेत्रों में ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू होना कृषि विविधीकरण की दिशा में सकारात्मक संकेत है। फूलों की खेती को भी बढ़ावा मिल रहा है, जिससे अन्य राज्यों पर निर्भरता कम हो रही है।
मथुरा महतो ने बताया कि मछली पालन के क्षेत्र में झारखंड आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। चांडिल, तेनुघाट, मैथन और रुक्का डैम इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। सरकार मत्स्य पालन के लिए तीन प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध करा रही है। इसके अलावा महिला किसान योजना के माध्यम से महिलाओं की कृषि क्षेत्र में भागीदारी बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
सदन का माहौल गरमाया
कृषि बजट पर हुई चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी रहा। विपक्ष ने बजट के कार्यान्वयन और वास्तविक खर्च पर सवाल उठाए, जबकि सत्ता पक्ष ने इसे किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए लाभकारी बताया। इस बहस के चलते सदन का माहौल काफी गरमाया और चर्चा देर तक चलती रही।
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