Chhattisgarhi Culture And Tradition: जांजगीर चांपा जिले के जिला स्तरीय युवा उत्सव मनाया गया, जिसमें स्वामी आत्मानंद स्कूल सारागांव की छात्राओं ने छत्तीसगढ़ की पारंपरिक वेशभूषा, आभूषण और लोक संस्कृति का मनोहारी प्रदर्शन किया गया.
छत्तीसगढ़ महतारी बनी वसुधा बरेट बताया की सेजेस (स्वामी आत्मानंद स्कूल) सारागांव से हूं और युवा महोत्सव में मैं प्रतिभागी बनी हुई हूं और जो मैंने वेशभूषा धारण की है, वह छत्तीसगढ़ महतारी की है और जो मैंने अपने साथ में राज्य के प्रतीक को छत्तीसगढ़ की पहचान है उसे रखा हुआ है, उसमें धान का कटोरा, हसिया और छत्तीसगढ़ महतारी की फोटो भी लगाया हुआ है और साथ ही उनके द्वारा अपने कमर में धान की बलियों से बने जिसे चिरई चुरगुन कहा जाता है वो लगाया हुआ है, वही उन्होंने कहा की सबको छत्तीसगढ़ के बारे में पता होना चाहिए, यहां की रहन सहन, वेशभूषा, उसकी कला के बारे में, उसकी वेशभूषा के बारे में पता होना चाहिए, सब लोग छत्तीसगढ़ को और आगे बढ़ाएं, उसकी वेशभूषा को याद रखें.
क्या होता है गौर सिंग?
छत्तीसगढ़ की जनजातीय की वेशभूषा पहने हर्षित यादव ने जय जोहार, जय छत्तीसगढ़ संबोधन करते हुए अपने पहने हुए वेशभूषा और इसकी परंपरा के बारे में बताया की सिर में गौर सिंग पहना हुआ हैं, छत्तीसगढ़ में गौर का मतलब जंगली भैंसा होता है, जिसे राजकीय पशु का दर्जा दिया गया है उसी जंगली भैंसा का सींग है जिसे गौर सिंग कहा जाता हैं. इसके सींग को ताकत का प्रतीक माना जाता है, मुरिया जनजाति में किसी भी सम्मान समारोह में पहना जाता हैं. वहीं, सामने में पगड़ी से बंधे हुए जो कौड़ी से बना हैं, वही गले में रुपया माला पहने हुए हैं, साथ ही चांदी के गोल गले में पहने हुए जिसे सुर्रा कहते हैं, और गोठला भी कहते हैं, हाथ में गोल चांदी की कड़ा पहने हैं जिसे चूड़ा कहा जाता हैं. यह वेशभूषा मुरिया जनजाति वर्ग में जब कोई भी त्योहार या बस्तर दशहरा होता है, तो वहां के मुरिया जनजाति के लोग इस सींग को पहनकर अपना प्रदर्शन करते हैं और नृत्य करते हैं.
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