जिला उद्यान अधिकारी रंजना माखीजा ने बताया कि जांजगीर- चांपा जिले में 100 हेक्टेयर लक्ष्य रखा गया है, जिसमें अब तक 64 हेक्टेयर में ऑयल पाम का रोपण कराया जा चुका है. उन्होंने बताया कि ऑयल पाम की खेती को बढ़ावा देने के लिए केंद्र और राज्य सरकार किसानों को अनुदान भी दे रही हैं. जिसमें प्लांटिंग मैटेरियल जिसकी लागत लगभग 29,000 रुपए आती है, किसानों को पूरी अनुदान राशि में दिया जा रहा है. अगर किसान बोरवेल बनवाना चाहते हैं तो इसके लिए 50,000 रुपए का अनुदान, पंप सेट के लिए 25,000 रुपए, इंटरक्रॉपिंग के लिए 5,250 रूपए एवं गड्ढा निर्माण और रखरखाव के लिए भी 5,250 रूपए दिए जाते हैं. इसके साथ ही ड्रिप सिंचाई के लिए किसानों को 14,000 रुपए तक सहायता दी जा रही है. कुल मिलाकर किसानों की लगभग 50% लागत सरकार द्वारा वहन की जा रही है.
उन्होंने बताया कि अगर एक हेक्टेयर की कुल लागत लगभग 3 लाख रुपए मानी जाए तो किसानों को 1 लाख 30,000 रूपए से अधिक की सहायता प्राप्त हो रही है, इसके अलावा बाड़ी लगाने के लिए 54,000 रूपए की टॉप-अप सहायता भी प्रस्तावित है.
उद्यान अधिकारी ने बताया की ऑयल पाम की फसल का उत्पादन चौथे वर्ष से शुरू होता है, इसके लिए जिले का गोदरेज एग्रोवेट कंपनी से समझौता है, जो किसानों से उत्पाद बाजार दर के अनुसार खरीदेगी, यह कीमत 14.40 रुपए प्रति किलो से कम नहीं हो सकती है, वर्तमान में अभी बाजार दर 18 रुपए प्रति किलो चल रही है. ऐसे में किसानों को विपणन की चिंता नहीं करनी पड़ती.
वहीं, एक हेक्टेयर ऑयल पाम से किसान 1.5 लाख रुपए से 3.5 लाख रुपए तक वार्षिक आय प्राप्त कर सकते हैं, शुरुआती तीन वर्षों में जब पेड़ से उत्पादन नहीं मिलता है, तब किसान इंटरक्रॉपिंग करके अच्छी कमाई कर सकते हैं. अगर वे ग्राफ्टेड बैंगन, सब्जी, केला या पपीता लगाते हैं, तो तीन वर्षों में ही 5 लाख रुपए तक की आय संभव है, पेड़ के बड़े होने के बाद किसान हल्दी, अदरक जैसी छाया पसंद फसलें ले सकते हैं, जिससे उन्हें 1.5-2 लाख रुपए अतिरिक्त आय मिल सकती है.
ऑयल पाम के लिए कैसे आवेदन करें
रंजना माखीजा ने बताया कि ऑयल पाम की फसल खाली पड़ी भूमि के लिए बहुत ही अच्छी है और कई किसान अब धान छोड़कर इस ओर आकर्षित हो रहे हैं. एक हेक्टेयर में 143 पौधों का त्रिकोणीय पैटर्न बनाकर रोपण किया जाता है. आवेदन स्वीकृत होने के बाद उद्यानिकी विभाग की टीम लेआउट तैयार करती है और कंपनी के माध्यम से विदेशी किस्म के पौधे उपलब्ध कराए जाते हैं. इसकी शुरुआती छह महीने बेहद महत्वपूर्ण होते हैं, जिनमें सिंचाई, उर्वरक और ड्रिप प्रबंधन की पूरी ट्रेनिंग किसानों को दी जाती है और परामर्श और तकनीकी सहायता मिलने से किसान सुगमता से ऑयल पाम की खेती शुरू कर सकते हैं.
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