Holika ash tradition : जांजगीर-चांपा में 3 मार्च को ग्रहण के कारण रंगों की होली 4 मार्च को मनाई जाएगी. पंडित बसंत शर्मा महाराज ने होलिका दहन, होलाष्टक और परंपराओं का महत्व बताया. खास बात यह है कि यहां होलिका की राख को घर पर रखने की परंपरा है, जिसके अपने फायदे होते हैं.
होलिका दहन और ग्रहण का संयोग
जांजगीर पुरानी सिंचाई कॉलोनी के दुर्गा मंदिर के पंडित बसंत शर्मा महाराज ने बताया कि इस वर्ष 2 मार्च को होलिका दहन होगा, रात्रि 12 बजे से 2 बजे तक होलिका दहन का शुभ मुहूर्त रहेगा. इसके अगले दिन 3 मार्च को ग्रहण लगने के कारण रंगों की होली 4 मार्च को मनाई जाएगी उन्होंने बताया कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं है, बल्कि आपसी प्रेम, भाईचारे और सौहार्द का प्रतीक है. छत्तीसगढ़ में छेरछेरा पर्व पर अन्नदान कर खुशियां बांटी जाती हैं, उसी प्रकार होली के अवसर पर मन की कटुता त्यागकर आपसी सद्भाव के साथ त्योहार मनाया जाता है.
होलिका दहन की परंपराएं और मान्यता
महाराज ने बताया कि जिस स्थान पर होलिका दहन किया जाता है, वहां होली के दिन जाकर परिक्रमा करनी चाहिए. अपने और अपने परिवार की ओर से कंडा (छेना) अर्पित करना शुभ माना जाता है, होलिका दहन की राख (भस्म) को अत्यंत पवित्र माना गया है, मान्यता है कि इस भस्म को शरीर पर लगाने से दाद-खुजली जैसे त्वचा रोग नहीं होते और पूरे वर्ष शरीर निरोग रहता है. कुछ भस्म घर लाकर पूरे वर्ष सुरक्षित रखी जाती है, जिससे घर में नकारात्मकता नहीं आती और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है.
इसके अलावा, घर से कंडा लेकर होलिका दहन स्थल पर जाकर वहां की अग्नि का थोड़ा भाग घर लाना भी शुभ माना गया है, जब वह अग्नि राख में परिवर्तित हो जाए तो उसे किसी डिब्बे में भरकर सुरक्षित रख लें. मान्यता है, कि यदि बच्चों को नजर लग जाए या वे अत्यधिक रो रहे हों, तो उस राख का तिलक लगाने से उन्हें राहत मिलती है.
होलाष्टक का महत्व
महाराज ने आगे बताया कि होली से एक सप्ताह पहले होलाष्टक प्रारंभ हो जाता है, इस अवधि में सभी शुभ कार्यों पर प्रतिबंध रहता है. विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते, होली के पश्चात होलाष्टक समाप्त हो जाता है और पुनः सभी शुभ कार्य प्रारंभ हो जाते हैं. इस प्रकार होली का यह पर्व केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था, परंपरा और सामाजिक एकता का प्रतीक है, जो समाज में प्रेम, सद्भाव और सकारात्मकता का संदेश देता है.
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7 वर्षों से पत्रकारिता में अग्रसर. इलाहबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नालिस्म की पढ़ाई. अमर उजाला, दैनिक जागरण और सहारा समय संस्थान में बतौर रिपोर्टर, उपसंपादक औऱ ब्यूरो चीफ दायित्व का अनुभव. खेल, कला-साह…और पढ़ें
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