बम्बू आर्टिस्ट कृष्ण कुमार कौशिक ने बताया कि केंद्र सरकार की योजना से ट्रेनिंग संचालित किया जाता था. इसी के तहत संस्था के द्वारा केंद्र सरकार के निर्देश में प्रशिक्षण के कराया जाता है जिसमें स्थानीय जिले जांजगीर चांपा, सक्ती, कोरबा के साथ साथ कोई भी अन्य जिला के व्यक्ति यहां बांस शिल्प कला के रूप में सिख सकते हैं, जिसमें ट्रेनिंग प्राप्त कर रहे व्यक्ति का रहना, खाना और ट्रेनिंग सभी निःशुल्क रहता है. इसमें मास्टर ट्रेनर के द्वारा बांस से कैसे ट्रे, चाय कप, लेडिस पर्स, पेन स्टैंड, झूमर लैंप, गणेश मूर्तियां और फर्नीचर आदि कैसे बनाया जाता है. ये सभी स्टेप बाय स्टेप सिखाया जाता है. ये वस्तुएं न सिर्फ घरों की सुंदरता बढ़ाती हैं, कला और प्रतिभावान व्यक्तियों के लिए आत्मनिर्भरता का जरिया भी बन रही हैं. बम्बू आर्टिस्ट के रूप में अब तक यहां से 250 से अधिक अभ्यार्थी बांस शिल्प कला सिख चुके हैं.
कैसे बनता है क्राफ्ट आइटम
• बम्बू आर्टिस्ट कृष्ण कुमार ने बताया कि बांस से क्राफ्ट आइटम बनाने की प्रक्रिया काफी मेहनत और समय की मांग करती है, उदाहरण के तौर पर यदि पेन स्टैंड, या पर्स बनाना है तो सबसे पहले बांस को तय आकार में काटा जाता है,
• इसके बाद उसे 24 से 48 घंटे तक रासायनिक पानी में भिगोया जाता है, ताकि बांस मजबूत और टिकाऊ बन सके फिर उसे बाहर निकालकर अच्छी तरह फिनिशिंग की जाती है, एक उत्पाद को तैयार करने में लगभग दो से तीन दिन का समय लगता है.
• व्यक्ति अच्छी तरह सिख जाने के बाद अपने तैयार किए गए सामान के अनुसार इनकम कमा सकता है, छोटे सामान बनाने में मेहनत थोड़ी ज्यादा होती है, लेकिन इसमें मुनाफा भी बेहतर मिलता है. वहीं, बांस से बने सजावटी सामान जैसे झूमर लैंप, टेबल लैंप, गणेश मूर्ति, दीवार हैंगर आदि की मांग मार्केट में काफी है और इनमें लाभ की संभावना और भी अधिक होती है.
• वहीं, बम्बू आर्टिस्ट कृष्ण कुमार ने कहा कि योग्य युवाओं को अपना रुचि का अनुसार बांस शिल्प कला सिखकर गांव में घर में रहकर ही यह कार्य कर सकते हैं, और अपने समान को ऑनलाइन बेचकर भी पैसा कमा सकते हैं.
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