जमुई के सिमुलतल्ला थाना क्षेत्र के टेलवा बाजार में 8 दिसंबर को एक शिक्षक के घर हुई डकैती के 81 दिन बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं। इस घटना ने इलाके में चल रहे कथित सूदखोरी और गिरवी के बड़े नेटवर्क को भी जांच के दायरे में ला दिया है। 8 दिसंबर की सुबह करीब 6:30 बजे, सफेद स्कॉर्पियो से आए हथियारबंद बदमाशों ने खुद को पुलिसकर्मी बताया। उन्होंने एक सर्च वारंट जैसा दस्तावेज दिखाकर घर में प्रवेश किया और सीधे उस अलमारी तक पहुंचे जहां लाखों के जेवर रखे थे। बदमाशों ने हथियार के बल पर लगभग 20-25 लाख रुपये मूल्य के आभूषण लूटे और फरार हो गए। यह डकैती सरकारी शिक्षक संजीव गुप्ता के घर हुई थी। शिक्षक के पास गिरवी रखा था सोना घटना के लगभग एक महीने बाद, 4 जनवरी को चंद्रमंडी इलाके के दो स्वर्ण व्यवसायी मनोज पोद्दार और अनिल उर्फ मन्नू दर्जनों ग्राहकों के साथ शिक्षक के घर पहुंचे। उन्होंने दावा किया कि लूटा गया सोना उनका था, जिसे उन्होंने शिक्षक के पास गिरवी रखा था। इस खुलासे के बाद पुलिस जांच का ध्यान डकैती से हटकर अवैध सूद लेनदेन और गिरवी के कारोबार की ओर भी मुड़ गया है। सूत्रों के अनुसार, पुलिस अब यह पता लगा रही है कि क्या शिक्षक के घर से बड़े पैमाने पर सूदखोरी और गिरवी का कारोबार संचालित हो रहा था और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे। 81 दिन बाद भी नहीं मिले सबूत शिक्षक ने भी सवाल उठाया है कि अपराधियों को अलमारी की सटीक जानकारी कैसे मिली। उन्होंने इसे अंदरूनी सूचना या किसी सुनियोजित साजिश का हिस्सा बताया है। साथ ही, 81 दिन बाद भी पुलिस को कोई ठोस सबूत न मिलने पर भी सवाल उठाए गए हैं। झाझा अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी राजेश कुमार ने बताया कि सिमुलतला थाना कांड संख्या 104/25 में हर पहलू की जांच की जा रही है। पुलिस फर्जी वर्दी, वाहन और संभावित नेटवर्क के तार जोड़ने में जुटी है। जमुई की जनता में इस मामले को लेकर चर्चा है कि पुलिस कब तक केवल ‘जांच जारी है’ का बयान देगी और खाकी का नाम बदनाम करने वाले इन चेहरों से नकाब हटाएगी।
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