जमुई में भारत मुक्ति मोर्चा और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को जिला मुख्यालय स्थित समाहरणालय परिसर के गेट पर एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन जाति आधारित जनगणना, एससी-एसटी-ओबीसी के अधिकारों और शिक्षकों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर किया गया। इस दौरान केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन डीएम श्री नवीन को सौंपा गया। ओबीसी समाज के साथ ‘धोखाधड़ी’ प्रदर्शनकारियों ने आगामी राष्ट्रीय जनगणना में ओबीसी जातियों के लिए अलग कॉलम अनिवार्य रूप से जोड़ने की मांग की। नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने कैबिनेट में ओबीसी की जाति आधारित जनगणना का निर्णय लिया था, लेकिन जनगणना के नोटिफिकेशन में ओबीसी जातियों के लिए अलग कॉलम नहीं दिया गया, जिसे ओबीसी समाज के साथ ‘धोखाधड़ी’ बताया गया। इसके अतिरिक्त, एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के हित में सख्त यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन लागू करने की मांग भी उठाई गई। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि कमजोर नियम और सुप्रीम कोर्ट में कमजोर पैरवी के कारण इन वर्गों के अधिकारों को नुकसान पहुंचाया गया है। ज्ञापन में वर्ष 2011 से पूर्व नियुक्त सभी शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) से मुक्त करने की भी मांग की गई। यह कार्यक्रम जिलाध्यक्ष सह संयोजक प्रकाश मल्लि के नेतृत्व में आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे। मंटू मुर्मू, छोटेलाल मुर्मू, सूरज मरांडी और मनु मुर्मु ने सभा को संबोधित करते हुए बताया कि इन मांगों को लेकर देशभर में चरणबद्ध आंदोलन चलाया जा रहा है। महेंद्र दास और रंजीत दास ने घोषणा की कि 23 मार्च को देशभर के जिला मुख्यालयों पर रैली निकाली जाएगी, जबकि 23 अप्रैल को भारत बंद किया जाएगा। नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार जल्द ही इन मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है तो आंदोलन को और तेज एवं व्यापक किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
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