Bheembandh: जमुई-मुंगेर की सीमा पर बसे भीमबांध अब जल्द ही एक अंतरराष्ट्रीय स्थल के रूप में जाना जाएगा. गुजरात के जामनगर में रिलायंस इंडस्ट्री के द्वारा बनाए गए विश्व के सबसे बड़े पशु संरक्षण केंद्र वनतारा की तर्ज पर भीमबांध का विकास किया जाएगा. जिसमें करीब पांच सौ करोड़ रुपए का खर्च आएगा. भीम बांध अपने गर्म पानी की नदियों के लिए जाना जाता है.
इसे प्रोजेक्ट को लेकर उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने हाल ही में एक बड़ी घोषणा की है. उन्होंने बताया कि गुजरात के विश्वप्रसिद्ध वन्यजीव संरक्षण एवं पुनर्वास केंद्र वनतारा की तर्ज पर भीम बांध को विकसित करने की घोषणा की है. उन्होंने बताया कि PPP मोड के तहत करीब 500 करोड़ रुपये की लागत से इस वन क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा.

सम्राट चौधरी रिलायंस समूह द्वारा संचालित गुजरात के वनतारा वन्यजीव संरक्षण केंद्र से काफी प्रभावित हुए हैं. उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि जिस तरह वनतारा को करीब पांच हजार करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया गया है और वह आज दुनिया के सबसे बड़े पशु संरक्षण केंद्रों में गिना जाता है. उसी सोच के साथ भीम बांध को भी एक नए स्वरूप में ढाला जाएगा. हालांकि बजट के स्तर पर यह परियोजना वनतारा से बहुत छोटी होगी, लेकिन सुविधाओं और संरचना के मामले में इसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार किया जाएगा.

गौरतलब है कि यह जंगल मुंगेर, जमुई और बांका जिले की सीमाओं से जुड़ा हुआ है और काफी विशाल क्षेत्र में फैला हुआ है. यहां पहाड़, घने जंगल, गर्म जलस्रोत और वन्यजीवों की विविध प्रजातियां पहले से मौजूद हैं. सरकार का मानना है कि इन प्राकृतिक विशेषताओं के कारण भीम बांध को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की अपार संभावनाएं हैं. इसी कारण इसे दुनिया के पर्यटकों से जोड़ने की योजना बनाई जा रही है.
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इस परियोजना के तहत जंगल के भीतर करीब 54 किलोमीटर लंबा ट्रैक विकसित किया जाएगा. इसके अलावा पर्यटकों के ठहरने के लिए आधुनिक कॉटेज, ईको फ्रेंडली आवास, व्यू प्वाइंट, ट्रैकिंग रूट और अन्य पर्यटक सुविधाएं विकसित होंगी. संपूर्ण आधारभूत ढांचे को इस तरह तैयार किया जाएगा कि प्रकृति और वन्यजीवों को नुकसान न पहुंचे. सम्राट चौधरी ने कहा कि पहले 180 करोड़ रुपये का प्रस्ताव सामने आया था, लेकिन सरकार ने साफ कहा कि इतने बजट में अंतरराष्ट्रीय स्तर का पर्यटन केंद्र संभव नहीं है. इसलिए PPP मोड के तहत 500 करोड़ रुपये खर्च करने का निर्णय लिया गया.

गौरतलब है कि भीमबांध का इलाका अपने गर्म पानी की नदियों के लिए जाना जाता है. यहां गर्म पानी का कुंड भी मौजूद है. जहां बड़ी संख्या में पर्यटक जुटते हैं. इसके अलावा इस स्थान का संबंध महाभारत काल से भी है. ऐसा माना जाता है कि अपने अज्ञातवास के दौरान पांडवों में से एक भी ने यहां इस बांध का निर्माण कराया था. ऐसे में अब सरकार की इस घोषणा के बाद यहां रहने वाले लोगों में उम्मीद की एक नई किरण देखने को मिल रही है.

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की मंशा केवल पर्यटन बढ़ाने की नहीं है, बल्कि इसके जरिए स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराना भी लक्ष्य है. जब देश और विदेश से पर्यटक यहां आएंगे, तो होटल, गाइड, परिवहन, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा मिलेगा. इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और क्षेत्र के उत्पादों को वैश्विक पहचान हासिल होगी.
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