ऐसे में अगर आप भी टिकट न मिलने की चिंता में हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है. टाटानगर से बिहार के लिए चलने वाली बस सेवाएं इस समय यात्रियों के लिए सबसे बेहतर और भरोसेमंद विकल्प बनकर सामने आई हैं. जानकारी देते हुए अर्जुन सिंह बताते हैं कि टाटा से लगभग बिहार के हर एक जिले के लिए बसों की सुविधा उपलब्ध है. रोजाना बड़ी संख्या में नॉन एसी, एसी और वोल्वो एसी बसें बिहार के अलग-अलग शहरों और जिलों के लिए रवाना होती हैं, जिससे यात्रियों को काफी सहूलियत मिल रही है.
टाटानगर से बिहार जाने वालों के लिए बस
अगर गंतव्यों की बात करें, तो टाटानगर से बिहार शरीफ, गया, नवादा, छपरा, आरा, पटना, सीतामढ़ी, मोतिहारी, बेगूसराय, दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, वैशाली (हाजीपुर), सीवान, गोपालगंज, बक्सर, सासाराम (रोहतास), जहानाबाद, अरवल, औरंगाबाद, लखीसराय, शेखपुरा, जमुई, मुंगेर, खगड़िया, सुपौल, मधेपुरा, अररिया, किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार, सहरसा और भागलपुर जैसे जिलों तक बसें नियमित रूप से जाती हैं. यानी उत्तर बिहार से लेकर दक्षिण और मध्य बिहार तक लगभग हर इलाके के लिए सीधी या कनेक्टिंग बस सुविधा मिल जाती है.
बसों का किराया लगभग 600 रुपये
किराए की बात करें तो यह भी यात्रियों के लिए राहत भरी है. बसों का किराया लगभग ₹600 से शुरू होकर ₹1400 तक जाता है. नॉन एसी बसें जहां कम बजट में सफर का मौका देती हैं, वहीं वोल्वो एसी बसें आरामदायक यात्रा चाहने वालों के लिए बेहतर विकल्प हैं. सबसे खास बात यह है कि हर बस में कन्फर्म टिकट मिल जाती है, जिससे ट्रेन की तरह वेटिंग या कैंसिलेशन की चिंता नहीं रहती.अधिकतर बसें रात के समय टाटानगर से बिहार के लिए रवाना होती हैं, जिससे यात्री सुबह तक अपने गांव या जिले पहुंच जाते हैं. इससे न सिर्फ समय की बचत होती है, बल्कि परिवार के साथ आरामदायक सफर भी संभव हो पाता है. कुल मिलाकर, इस होली अगर ट्रेन की टिकट नहीं मिल रही है, तो टाटानगर से बिहार के लिए चलने वाली बस सेवाएं आपके सफर को आसान, सस्ता और भरोसेमंद बना सकती हैं, ताकि आप अपनों के साथ बेफिक्र होकर होली का त्योहार मना सकें.
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