अजय और प्रीति ने 20 जनवरी को जमशेदपुर से एक लंबी रोड ट्रिप की शुरुआत की, जो पूरे 40 दिनों तक चली. इस सफर के दौरान उन्होंने भारत के 19 राज्यों, 4 केंद्र शासित प्रदेशों और 9 ज्योतिर्लिंगों की यात्रा की. यह यात्रा न केवल पर्यटन थी, बल्कि भारत की विविधता, संस्कृति और एकता को करीब से समझने का एक अनोखा अनुभव भी रही.
10-15 किलोमीटर पर बदल जाती है भाषा और खानपान
अपनी यात्रा के बारे में बात करते हुए अजय ने बताया कि वे सबसे पहले Jamshedpur से घाटशिला होते हुए ओडिशा पहुंचे. वहां से आंध्र प्रदेश, कन्याकुमारी, गोवा, पांडिचेरी, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, पंजाब, चंडीगढ़, हरियाणा और उत्तर प्रदेश होते हुए मध्य प्रदेश, बिहार और बनारस पहुंचे. अंत में देवघर में Baba Baidyanath Dham के दर्शन कर वे वापस जमशेदपुर लौटे.
लोकल 18 से बातचीत में अजय ने कहा कि भारत में हर 10-15 किलोमीटर पर भाषा और खानपान बदल जाता है, लेकिन इसके बावजूद कहीं भी संवाद में कोई बाधा नहीं आती. भाषा भले अलग हो, लेकिन दिलों का रिश्ता हर भारतीय को एक-दूसरे से जोड़ता है. लोग एक-दूसरे की बात आसानी से समझ लेते हैं और हर जगह अपनापन महसूस होता है.
हर राज्य के लोगों का व्यवहार बेहद अच्छा
वहीं प्रीति मिश्रा ने बताया कि उन्हें बिहार की संस्कृति सबसे ज्यादा पसंद आई और वहां का खानपान बेहद स्वादिष्ट लगा. उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान लगभग हर राज्य में लोगों का व्यवहार बेहद अच्छा और सहयोगात्मक रहा. पुलिस प्रशासन ने भी कई स्थानों पर उनकी यात्रा को सुरक्षित और सुगम बनाने में पूरा सहयोग दिया.
इस रोड ट्रिप के दौरान अजय और प्रीति ने लोगों को रोड सेफ्टी का संदेश भी दिया. हालांकि, अजय का कहना है कि भारत अभी भी सड़क सुरक्षा के मामले में काफी पीछे है. कहीं छोटे बच्चे तीन-तीन सवारी करते नजर आते हैं, तो कहीं युवा तेज रफ्तार में गाड़ियां चलाते हैं. उन्होंने कई जगह लोगों को समझाने की भी कोशिश की.
भारत के सेवन सिस्टर्स राज्यों की यात्रा की योजना
अजय ने यह भी बताया कि पिछले साल उन्होंने यूरोप की यात्रा की थी और आने वाले समय में वे भारत के सेवन सिस्टर्स राज्यों की यात्रा करने की योजना बना रहे हैं. इस पूरी यात्रा को वे टाटा स्टील के संस्थापक को समर्पित करना चाहते हैं. उनका लक्ष्य था कि 3 मार्च, संस्थापक दिवस से पहले जमशेदपुर लौटें, जिसे उन्होंने सफलतापूर्वक पूरा किया.
अजय और प्रीति की यह यात्रा न सिर्फ घूमने का अनुभव है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि अगर हौसले बुलंद हों, तो उम्र और सीमाएं कभी आड़े नहीं आती.
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