घाटी में सोमवार को अधिकतर जगह हल्के बादल छाए रहे। इससे दिन के तापमान में थोड़ी राहत मिली। अधिकतम तापमान अब भी सामान्य से 10 डिग्री तक अधिक चल रहा है। रात में गर्मी बढ़ रही है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान केंद्र के अनुसार मंगलवार को कुछ जगह हल्की बारिश हो सकती है।
सोमवार को श्रीनगर में अधिकतम तापमान 22.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जो सामान्य से 7.7 डिग्री अधिक है। वहीं न्यूनतम तापमान 6.4 डिग्री सेल्सियस रहा जो सामान्य से 3.1 डिग्री अधिक है। कश्मीर के प्रवेश द्वार काजीगुंड में अधिकतम तापमान 23.6 डिग्री सेल्सियस रहा जो सामान्य से 9.7 डिग्री अधिक है। न्यूनतम तापमान 5.2 डिग्री रहा जो सामान्य से 3.1 डिग्री अधिक है।
पहलगाम में अधिकतम तापमान 19.3 डिग्री सेल्सियस रहा जो सामान्य से 7.9 डिग्री अधिक है। न्यूनतम तापमान 3.0 डिग्री रहा जो सामान्य से 4.6 डिग्री अधिक है। गुलमर्ग में अधिकतम तापमान 13.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जो सामान्य से 9.0 डिग्री अधिक है, वहीं न्यूनतम तापमान 4.5 डिग्री सेल्सियस रहा जो सामान्य से 8.5 डिग्री अधिक है।
पुंछ-राजोरी में भी बारिश का अनुमान
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, 10 मार्च को कश्मीर में कई जगहों पर खासकर उत्तरी कश्मीर में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। पुंछ-राजोरी इलाके में भी हल्की बारिश हो सकती है। 11 मार्च को कश्मीर में ज्यादातर जगहों पर और जम्मू इलाके के कुछ हिस्सों में हल्की से भारी बारिश हो सकती है।
12 मार्च को हल्की बारिश और बर्फबारी की उम्मीद है। 13-14 मार्च को कुछ जगहों पर खासकर ऊंचाई वाले इलाकों में कहीं-कहीं बारिश या बर्फबारी हो सकती है। इस दौरान बीच-बीच में तेज हवा चलने की संभावना है। गांदरबल, बांदीपोरा और कुपवाड़ा के ऊंचाई वाले इलाकों में इस मौसम का सबसे ज्यादा असर पड़ने की संभावना है।
हिमालय में एसिडिक बारिश या ब्लैक स्नो की आशंका बहुत कम
सोशल मीडिया पर ईरान पर अमेरिका-इस्राइल के हमले से तेल के भंडारों में लगाई आग से कश्मीर में ब्लैक स्नो या जहरीली एसिडिक बारिश की आशंका जताई जा रही है। मौसम विभाग के अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि मौजूदा हालात और मौजूद जानकारी के आधार पर इस समय ऐसी आशंका बहुत कम है।
पश्चिमी एशिया में तेल इंफ्रास्ट्रक्चर का बड़े पैमाने पर नुकसान नहीं हुआ है। खासकर तेल के कुओं या रिफाइनरियों के लंबे समय तक जलने से जुड़ी घटनाएं, जिनसे दूर तक प्रभाव पड़े। इस इलाके में अब तक रिपोर्ट की गई ज्यादातर घटनाएं सिर्फ हमले या कम समय की आग रही हैं जिनमें से कई पर कुछ ही घंटों में काबू पा लिया गया था। प्रभावित क्षेत्र से कश्मीर लगभग 1800 से 4000 किमी दूर है, और जब तक छोटी आग से निकलने वाला धुआं या एरोसोल इतनी दूर तक जाते हैं, तब तक वे आम तौर पर बहुत ज्यादा बिखर जाते हैं और साफ हवा के साथ मिल जाते हैं। ब्लैक स्नो या एसिड रेन जैसी घटनाओं के होने के लिए, पार्टिकुलेट मैटर और सल्फर कंपाउंड के बहुत ज्यादा और लगातार जरूरत होगी। इसलिए, मौजूदा हालात में कश्मीर में ब्लैक स्नो या जहरीली एसिडिक बारिश की आशंका बहुत कम है।
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