उद्घाटन समारोह में मंत्री जवाहर सिंह बेड़म ने कहा कि आज के समय में केवल पारंपरिक तरीकों से खेती और पशुपालन करने से सीमित लाभ मिलता है. यदि किसान आधुनिक दुग्ध उत्पादन तकनीकों, वैज्ञानिक पद्धतियों और उन्नत नस्लों को अपनाएँ, तो वे अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं. उन्होंने संतुलित पशु आहार, सही पोषण प्रबंधन और पशुओं की नियमित देखभाल को दूध उत्पादन बढ़ाने की कुंजी बताया. उनका कहना था कि सही जानकारी और नई तकनीक अपनाकर किसान आत्मनिर्भर बन सकते हैं.
कृषि में एआई और नई योजनाओं की भूमिका
विश्वविद्यालय के कुलगुरु पुष्पेंद्र सिंह चौहान ने किसानों को संबोधित करते हुए विश्वविद्यालय की उपलब्धियों और गौरवशाली इतिहास की जानकारी दी. उन्होंने वर्ष 2026 के बजट में घोषित कृषि योजनाओं को सरल भाषा में समझाया. उन्होंने कहा कि अब खेती में ए.आई. (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, जिससे फसल की निगरानी, उत्पादन का आकलन और कीटनाशक छिड़काव जैसे कार्य अधिक सटीक और आसान हो गए हैं. साथ ही उन्होंने “नमो ड्रोन दीदी योजना” का उल्लेख करते हुए बताया कि इस योजना के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण देकर उन्हें कृषि क्षेत्र में सशक्त बनाया जा रहा है.
डेयरी क्षेत्र में सहकारिता और महिला शक्ति
NDDB के अध्यक्ष मिनेश शाह ने किसानों को डेयरी क्षेत्र में नई तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया. उन्होंने कहा कि डेयरी विकास में महिलाओं की भागीदारी बहुत महत्वपूर्ण है और सहकारी संस्थाओं से जुड़कर किसान अधिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं. उन्होंने देश में दुग्ध क्रांति लाने वाले ऐतिहासिक कार्यक्रम ऑपरेशन फ्लड का उल्लेख करते हुए बताया कि इस योजना ने भारत को दुग्ध उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभाई.
दो दिवसीय इस मेले में लगभग 20,000 किसान और पशुपालक शामिल होने का अनुमान लगाया जा रहा है बताया जा रहा है कि राजस्थान के सभी जिलों से आए किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया. मेले में विभिन्न नस्लों की गायों की जानकारी दी जा रही है और बताया जा रहा है कि किस प्रकार बेहतर नस्ल, संतुलित आहार और वैज्ञानिक देखभाल से दूध उत्पादन बढ़ाया जा सकता है. कृषि एवं डेयरी से जुड़े आधुनिक उपकरणों, तकनीकों और नवाचारों की प्रदर्शनी आकर्षण का मुख्य केंद्र रही. किसानों को नई मशीनों और तकनीकों का लाइव प्रदर्शन भी दिखाया गया.
इतना ही नहीं,मेले में श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले किसान को 2 लाख 51 हजार रुपये का विशेष पुरस्कार दिया जाएगा. वही द्वितीय पुरस्कार 1.51 लाख रुपये और तृतीय पुरस्कार 1.11 लाख रुपये दिए जाएगें. इन पुरस्कारों से पशुपालकों में उत्साह और प्रतिस्पर्धा की भावना बढ़ेगी.इस घोषणा से किसानों में खासा उत्साह देखने को मिला. यह पुरस्कार किसानों को बेहतर कार्य करने और नई तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित करेगा.
हरियाणा की गाय रही प्रथम
कार्यक्रम में राजस्थान सहकारी डेयरी फेडरेशन लिमिटेड की प्रबंध निदेशक श्रुति भारद्वाज तथा आयोजक सचिव डॉ आर एन शर्मा भी उपस्थित रहे. “रंगीलों किसान मेला” केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि किसानों और पशुपालकों के लिए ज्ञान, तकनीक और प्रेरणा का संगम है. आधुनिक तकनीकों को अपनाकर, सहकारिता से जुड़कर और वैज्ञानिक तरीकों का उपयोग करके किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं और देश की कृषि एवं डेयरी व्यवस्था को और मजबूत बना सकते हैं. कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित हुए पशु मेले में हरियाणा की गाय प्रथम स्थान रही. गाय की खास बात यह हैं कि 24 घंटे में गाय लगभग 80 लीटर दूध देती हैं.
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.